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शनिवार, 5 दिसंबर 2015

ये चेहरे कुछ न कुछ कहते हैं ....






मलाई का हलवा :
ये आपको किसी हलवाई की दुकान पर नहीं मिलेगा । खाने के लिए संपर्क करें ।



हम पे सोने का पेन था जब तक
सब खतों के जवाब आते थे
तितलियां भेजते थे हम खत मे
और उधर से गुलाब आते थे
फ़हमी बदायूनी


अयोध्या में हनुमान गढ़ी से लेकर जन्मभूमि तक पतली गली जैसी सड़क है जिसके दोनों तरफ दुकानें हैं जिनमे टीन शेड लगाने से गली पतली हो गयी है... 2 नवम्बर 1990 को कारसेवकों का जत्था उन्हीं गलियों से भजन गाते, जयकारे लगाते जन्मभूमि की ओर बढ़ रहा था... दोनों तरफ टीन शेडों और छतों पर हज़ारों पैरा मिलिट्री फ़ोर्स और पुलिस वाले सशस्त्र खड़े थे। ऐसे समय में मुलायम सिंह ने गोली चलाने का आदेश दिया... गलियों से बाहर भागने का कोई रास्ता नहीं था... दोनों ओर छतों से गोलियाँ बरस रही थीं... कोई नहीं बचा... जो दुकानों में घुसे उन्हें पुलिस ने बाहर खींच कर गोली मार दी... रात भर ट्रकों में लाशें अज्ञात स्थानों और सरयू में फेंकी गयीं.... सरयू का पानी स्वयंसेवकों के लहू से लाल हो गया... लोग पूरे भारत से आए थे... इस लिए किसी की शिनाख्त नहीं हुई... सरयू में पानी बह गया... ये जघन्य सरकारी नरसंहार विस्मृति में दब गया...वही आततायी फिर से सत्ता पर काबिज़ अट्टहास कर रहा है... कहता है ज़रुरत पड़ी तो फिर चलवाऊंगा गोलियाँ... सहिष्णुता के पुजारी मौन हैं.... लेकिन कारसेवकों के नरसंहार का जवाबदेह कौन हैं ?



समाचार चैनल हों या सोशल मीडिया बेवजह के मुद्दों का शोर ही सुनने को मिलता है । अज़ब- गज़ब से मसलों पर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की आक्रमता और सोशल मीडिया की गैर जिम्मेदार अफवाहें देखते ही बनती हैं । देश में कोई प्राकृतिक विपदा आये या आतंकी हमला हो जाए, इन्हें कोई लेना देना नहीं । बस, आये दिन कोई ना कोई ऐसा मुद्दा खड़ा कर दिया जाता है जो आमजन की समस्याओं को लील जाता है । समस्याएं, जिन्हें सही मायने में सरोकार भरी बहस और हल की दरकार है ।
रोज एक नया मुद्दा उछलता है और फिर गुम हो जाता है । बिना किसी सार्थक बहस और निष्कर्ष के । दुखद पहलू ये कि यह प्रवत्ति कम होने की बजाय बढ़ती ही जा रही है । जबकि देश के समक्ष आज अनगिनत गंभीर मसले मौजूद हैं, नीतिगत निर्णय अटके पड़े हैं , जिनके बारे में सोचा जाना आवश्यक है ।


मैंने आँखें बिछायीं मगर आई ना, खुद को देखूँ तो डसने लगा आईना
आई ना आई ना शोर करता रहा, सुनके सचमुच दरकने लगा आईना
आई ना ना वो करते मेरे पास जब, सच कहूँ आई ना प्यास मिलने की तब
वो तो आकर के समझो अभी आई ना, मन के भीतर सिसकने लगा आईना



वाणी गीत feeling Greatful.

तुम
एक से नौ की
कोई संख्या
मैं तुम्हारे बाद का शून्य!
मैं शून्य ही सही
बस तुम्हारे बाद हूँ!!
बहुत दिनों बाद कुछ उपजा. कल किसी अपने ने "कैलीबर " याद दिलाया.




हमारे विकसित शहरों, महानगरों की सड़कों और गलियों में बरसात के पानी से हाहाकार मच जाता है पर वो दिन भी थे औरबिहार के एक जिले के वैसे छोटे से टाउनशिप में भी रहना हुआ जहां रात की भरपूर बारिश के बाद सामने का बड़ा मैदान सुबह सुबह अरब सागर, हिन्द महासागर सा लगता था,सड़क के साथ लगी हर छोटी बड़ी खाली जमीन पानी से लबालब, स्कूल से वापसी में जूते हाथ में हुआ करते और शौकिया रोड छोड़कर पानी भरे फील्ड में छपाछप। पानी जितनी जल्दी जमा होता उतनी ही जल्दी खाली भी, सत्तर के दशक में वहां एक बार बाढ़ आयी थी, रोड पर नाव चलने और छत पर खाना बनाने के किस्सों के बीच गुस्सा आता, हमारे टाईम में गंगा के किनारे गुप्ता बांध क्यों बना दिया गया, अब शहर में बाढ़ जैसा पानी नहीं आता जबकि वो केवल इम्बेकमेंट था कई बार बगल के एक गांव महना होते हुए गुप्ता बांध से गंगा का प्रवाह देखने जाया करते थे, पता नहीं अब क्या हाल है लेकिन बरसात के बाद पानी जमा होने से छई छप्पा समेत जितने तरह के खेल खेले जा सकते थे हम खेलते थे, अंजूरी में छोटी-छोटी मछलियां और टेडपाल भरकर मां को अपना अचार वाला बोईयाम देने की आवाज लगाते थे, लेकिन ये तब की बात है जब हमारे शहर 'विकसित' नहीं हुए था और बरसने वाला पानी एक डर एक "प्राब्लम" नहीं था।

बहुत दिन होने को आए किसी ने कुछ लौटाया नहीं...!

चेन्नई आपदा के लिये आपलोगों से एक अनुरोध.. 18 दिसंबर को आ रही शाहरूख की मूवी दिलवाले को ना देखकर टिकट के 150 रूपए चेन्नई आपदा के लिये प्रधानमंत्री राहत कोष में जरूर दे.. आपकी यह एक छोटी पहल आगे पहाड़ बनेगी।



एक ख्याल यूँ ही ,,,,,,,,,
===========
इश्क की तन्हाई
शाख़े उम्मीद पर पनपती आशनाई
होती है ख़ार की मानिंद
चाहे लिख डालो दर्ज़नो रुबाई
राजेश सिन्हा,,,,,,,
 
 

पहला पराठा खाते समय स्वाद की अनुभूति ... दूसरा पराठा खाते समय सुकून का एहसास .... और तीसरा पराठा खाते समय - हे पराठे तुम कब खत्म होओगे ... 😎 😊 😇


अद्भत है न यह शेर-
कितने दिलकश हो तुम, कितना दिलजूं हूँ मैं
क्या सितम है कि हम लोग मर जायेंगे
-जॉन एलिया



तुम क्या गईं
मैं बेसुरा हो गया
जीवन-संगीत और वस्तुगत आकर्षण
सब बुरा हो गया
मैं पँक्तियों के खो जाने पर भी रोया हूँ
तुम तो समूची स्त्री थीं

[ अविनाश मिश्र ]



मुख्यमंत्री जी विधानसभा में ...
केंद्र सरकार भ्रष्ट है जी ,
कांग्रेस भाजपा भ्रष्ट हैं जी,
दिल्ली पुलिस भ्रष्ट है जी,
बिजली बोर्ड , जल बोर्ड भ्रष्ट हैं जी,
नगर- निगम वाले भ्रष्ट हैं जी
योगेन्द्र -प्रशांत , भ्रष्ट हैं जी ,
ACB -Lt. Governor , भ्रष्ट हैं जी
ऑटो वाले भ्रष्ट हैं जी.....

कोर्ट, इनकम टैक्स, डीडीए, ...........सब के सब भ्रष्ट हैं जी ...
दिल्ली में कुल ईमानदार ....सिर्फ 67 MLA हैं जी

बुधवार, 25 दिसंबर 2013

दीवारों पे कुछ लिख कर छोडा है

 

ABP News

आप सभी को ABP News की तरफ से क्रिसमस की शुभकामनाएं..!!

आप सभी को @[153808061303123:274:ABP News] की तरफ से क्रिसमस की शुभकामनाएं..!!

 

 

बेचैन आत्मा shared चित्रों का आनंद's photo.

पानी में सीप जइसे प्यासल हर आत्मा
प्यास बुझी कउने जल से ? ...केहू जाने ना।
ओहरे...

चित्रों का आनंद's photo.

 

 

Anshu Mali Rastogi

सो जा प्यारे नहीं तो ईमानदार आ जाएंगे।

 

 

Awesh Tiwari

आज मिल गए हौजखास चौराहे से पहले की लालबत्ती पर अजहर और आलिया ,एक के पैर में स्टील के जूते तो एक के पास दो बैसाखियाँ ,दोनों अपने कई पहियों वाले स्कूटर पर |भीड़ में तेजी से नई इनफिल्ड से आगे बढ़ रहे एक लड़के ने पटरी से थोडा आगे खड़े एक बच्चे को जैसे ही धक्का मारा ,अजहर तेजी से चिलाया अब्बे साले रुक तो ..आवाज का जोर देखने लायक था ,खैर बच्चे को चोट नहीं आयी ,अजहर की आवाज ने थोडा काम किया आगे खड़े ट्रेफिक पुलिस वाले ने बाकी बचा काम पूरा कर दिया गया |बड़ा शहर कमजोर और ताकतवर का फासला कम कर देता है |

 

 

 

Darpan Sah

खुद को ताउम्र सहन करना
बने रहना ख़ुद के साथ हमेशा
कभी खुद को भूला न पाए
कभी खुद की याद न आये
अपने को खोजना दरअसल घुप्प अँधेरे में सुई खोजने नहीं
वो है अँधेरा खोजना
अपना होना बाकी सब की अनुपस्थिति मात्र है
इससे अधिक कुछ नहीं
इतना सा भी नहीं
कान बंद करके सुना जा सकता है जिसे
आँख बंद करके देखा जा सकता है उसे
महसूस किया जा सकता है जिसका स्पर्श
सारी सम्वेदनाओं को नकार के
असत्य है ये कथन कि मैं उदास हूँ
मैं खुद को खुद ही उदास करता हूँ,
मेरे पास मेरा कोई विकल्प नहीं
मृत्य भी नहीं
आत्महत्या करना भी खुद की उम्मीद करना ही है
अपने को स्वीकारना.
कुछ लिखने या कहने से अधिक बड़ी अभिव्यक्ति
रोना और चार सौ कविताएँ पढना
अन्यथा कुछ भी तो न पढ़ता
और अगर पढ़ता तो
कोई कविता अधूरी पढ़े बिना नहीं छोड़ता
और जब मैं अपने को जानने के बावज़ूद
प्रेम कर सकता हूँ अपने से
तो कोई कारण नहीं कि फिर मैं किसी और से प्रेम न करूं.
बाकी सब तो फिर भी अपेक्षाकृत कम 'मैं' हैं.

 

 

Parveen Chopra

जहाँ तक मुझे याद है लगभग 30 वर्ष पहले के दिनों में घर में एक अदद कमबख्त टेलीफोन की डायरेक्टरी होना एक अच्छा खासा स्टेटस सिम्बल हुआ करता था चाहे घर में किसी को देखनी आये या न आये.....इतनी हिमाकत की डायरेक्टरी में अपना या अपने बापू का नाम देख कर मेट्रिक की मेरिट लिस्ट वाली सूची भी छोटी दिखती थी......इस विषय पर कल विस्तार से लिखूंगा.....अपने यादों के झरोंखों से कुछ इसमें दराज करवाना हो तो बतायेगा।

 

 

Gyan Dutt Pandey

आज कोहरा कम है। माल गाड़ियां कुछ ठीक चलने की सम्भावना है। गाना गुनगुनाने का मन हो रहा है।
वर्ना आई-बकुली हेराई हुई थी!

 

 

 

Sangita Asthana

खुदा हमको ऐसी खुदाई न दे कि अपने सिवा कुछ दिखाई न दे

 

 

Baabusha Kohli

बीती रात लाल टोपी वाला बाबा मेरे तकिये के पास बड़ा क़ीमती तोहफ़ा रख गया. इस तोहफ़े को 'सबक' कहते हैं.
माँ ने कहा - "ब्रह्म मुहूर्त में मिला सबक तेरे जीवन के युद्ध का ब्रह्मास्त्र बने, बाबुषा ! "
कल मेरी 'बड़ी रात' थी. आज मेरा 'बड़ा दिन' है.
[25 दिसम्बर, 13 की डायरी]

 

 

 

Shailja Pathak

बहुत सर्दी है
मखमल के पुराने शाल में
इया अपने को लपेटती
लिपट जाती कम्बखत बेटे की याद
बुझती बोरसी की आग
फिर से सुलग जाती
इया कोई गीत गुनगुनाती
दूर निर्जन रास्तों पर
दौड़ते पैरों के निशाँ है
फिर भागता शहर भी है आगे
एक दस्तक की आस में इया
बार बार बंद सांकल खोलती
उदासी बंद हो जाती
उनकी चुनौटी की डिबिया में
सफेदी बनकर
दर्द बेजुबान होता है इया
लाल बोरसी के करीब रखी हथेलियाँ
अब नही जलती
फफोले सखत पर्दों में है .....

 

 

 

Reeta Vijay

लोकप्रियता की खातिर अपने सिद्धांत न बेचें वरना आप पूरी तरह से दिवालिया हो जाएंगें !!!

 

 

Rashmi Prabha

कुछ लोगों के रिव्यु से मैं इस निष्कर्ष पर आई हूँ कि कुछेक लोग दिमाग से फ़िल्म या जीवन को नहीं देखते, गन्दगी को वे घृणित भाव से नहीं देखते - अचानक मुझे ऐसे लोगों में दिलचस्पी हुई … दिलचस्पी यानि अच्छा लगा कि ये ज़िन्दगी को कितने समभाव से हाहाहाहाहा करके गुजार लेते हैं - प्रॉब्लम तो तब होगी न जब दिमाग लगाया जाए और उसे सॉल्व करने के लिए अपनी जगह से उठा जाये !!!

 

 

Amitabh Agnihotri

दामन पे न कोई छींटे,न खंजर पे कोई दाग फ़राज़ !!!!
तुम क़त्ल करते हो , या कि करामात करते हो ?????

 

 

अरुन शर्मा अनन्त

मौत के साथ आशिकी होगी,
अब मुकम्मल ये जिंदगी होगी,
उम्र का ये पड़ाव अंतिम है,
सांस कोई भी आखिरी होगी,
आज छोड़ेगा दर्द भी दामन,
आज हासिल मुझे ख़ुशी होगी,
नीर नैनों में मत खुदा देना,
सब्र होगा अगर हँसी होगी,
आखिरी वक्त है अमावस का,
जल्द हर रात चाँदनी होगी.

 

 

Niraj Mishra

भूख ही सबसे बड़ा धर्म है, सबसे बड़ा देवता है
कलीमुद्दीन तो भूख की भट्ठी में
खाक हो गया था
..............................नागार्जुन

 

 

Lalit Joshi

कौन कहता है आसमाँ पर छेद नहीँ होता
ओजोन परत को एक दफा देख तो लो यारोँ
:))

बुधवार, 2 अक्टूबर 2013

चेहरों की चुटकियां …………..

 

  • Shweta Sharma added a new photo.

  •  

    • अरुण अरोरा

      बहुत ग़मगीन है ..

      मामला बहुत संगीन है

      सुना है बड़ी मेहनत से इस्तीफा लिख कर लाये थे

      अगले ने फाड़ दिया ...

    •  

      • Sanjay Bengani

        भ्रष्टाचारयुक्त सघन वातावरण में लालबहादूर शास्त्री निर्मलता का अनुभव देते है. विश्वास करना कठीन होता है कि उनका सम्बन्ध इसी कांग्रेस पार्टी से था. आज अखबार में शास्त्रीजी पर कोई विज्ञापन नहीं दिखा. क्या सरकारों की आँखों में अभी इतनी शर्म बची है कि वे ईमानदार प्रमं से कतरा रहे है. अगर ऐसा है तो समझिये उम्मीद अभी बची हुई है. गाँधी विरोधी तो मिल जाएंगे, शास्त्री विरोधी कम ही होंगे. अतः एक आध फोटो उनकी भी छपनी चाहिए, आज के दिन. #2 अक्टूबर

      •  

      • Priyanka Gahlot

        गाँधी के महिमा मंडन से ज्यादा ज़रूरी है गाँधी का पुनर्मूल्यांकन.

      •  

      • Prabhat Ranjan

        छोटा था लेकिन वो लोगों कद में बहुत बड़ा था/

        छोटे छोटे कदम थे लेकिन डग में बहुत बड़ा था....

        'जय जवान जय किसान' के अमर नायक लालबहादुर शास्त्री की स्मृति को प्रणाम!

      •  

      • Anita Maurya

        'वो '

        जानती थी,

        'वक़्त' अपने घर लौट कर नहीं आता,

        'उस' मोहिनी सी सूरत को,

        अपनी आँखों में भर लेना चाहती थी वो,

        उसे पता था,

        'बेशक' वापसी के 'वादे हजार' थे,

        'लेकिन' कोई रास्ता न था ...

        चाहे, अनचाहे ,

        'वो'

        रोज ही दर्द बन कर,

        उसकी आँखों से छलक पड़ता था,

        उसका लौट जाना,

        कभी मंजूर नहीं किया उसने,

        जाने कितनी ही रातें

        गुजारती रही वो,

        उसकी हथेली की छुअन

        अपनी हथेली पर महसूस करते,

        अपनी बंद पलकों में

        उसके सपने बुनते ...!!ANU!!

      •  

      • Manoj Kumar Jha

        तेरे वादे पर हम ने भरोसा किया …,

        कुछ तो उल्फत का तुम भी हक निभाया करो …;

        हम भी हमराज़ हैं तुम भी हमराज़ हो …,

        दिल की बात हमसे ना छुपाया करो ..!!!

      •  

      • सनातन कालयात्री

        युद्ध, त्रासदी और विनाश घातक रूप से सम्मोहित करने की क्षमता रखते हैं। दो महायुद्धों को झेल चुके यूरोप के साहित्य और कलाकर्मियों की रचनाओं में यह सम्मोहन प्रचुर उपलब्ध है।

      •  

        • निन्दक नियरे राखिये

          लालू प्रसाद यादव को कैदी नंबर 3312 मिला!

          सेकुलर होने के नाते उन्होंने जेल प्रशासन से 786 नंबर देने का आग्रह किया।

        •  

        • Abhay Tiwari

          आज एक दिन,

          अच्छा देखें!

          अच्छा सुनें!

          और अच्छा लिखें!

        •  

        • Vani Geet

          फेसबुक पर पेज बनाना चाहो तो क्या कैटेगरी चुने , ना हम पब्लिक फिगर हैं , ना रजिस्टर्ड राईटर… ब्लॉगर या होममेकर /गृहिणी का भी एक ऑप्शन होना चाहिए था !

        •  

        • Rashmi Mishra

          किसी को सजा देनी हो तो उसकी सबसे प्रिये चीज़ उससे अलग कर दो.... बंदा किश्तों मे मर जायेगा..!

          (ऐसे 'मर्डर' सिर्फ ईश्वर करते हैं, ये उनके न्याय का तरीका है...)

        •  

        • Mani Yagyesh Tripathi

          सच तो ये है कि मनमोहन अभी तक ये नहीं समझ पाये हैं कि 'देहाती औरत' कहकर नवाज शरीफ ने उनकी बेइज्जती की है या तारीफ...

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        • Era Tak

          बिना कहे तो वो कभी समझा नहीं

          अब कहने पर समझ ले तो गनीमत ...era ~ET~

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        • Arpit Bansal

          भला हो सरकार का नोटों पर बापू के फोटो है , वर्ना लोग आज याद नहीं कर पाते की ये अख़बार में छपी फोटो किसकी है ! गाँधी जयंती की शुभकामनाये !

          विशेष - ठेके बंद है पर दारू मिल रही है !

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        • Kajal Kumar

          यार ये दीपक चौरसि‍या तो बि‍ल्‍कुल चि‍रकुट सा लगता है

          अरे कोई तो इसे बताओ कि‍ गरि‍मा भी एक शब्‍द होता है

        •  

           

          Dev Kumar Jha

          जय जवान, जय किसान... जय हिन्द... शास्त्रीजी पर गर्व है।

          ऐसे सशक्त नेतृत्व की आवश्यकता है। बिना रीढ़ वाली व्यवस्था से मन उचाट हो गया है।