कोई भी बात शुरू करने से पहले , मेरा आग्रह है कि आप नीचे की इस छवि पर चटका लगा कर एक बार इस खबर को पढ लें ।
तो गोया थोडे में , लुब्बो लुआब ये कि , अब जबकि फ़ेसबुक पर रहते हुए फ़ेसबुक और ट्विट्टर जैसे अभिव्यक्ति मंचों को गरियाते रहने के साथ साथ खुद सरकार और प्रशासन भी इसे घुडकी पिलाने पर लगी है और चूंकि अब मामला न्यायपालिका के संज्ञान में है तो इसलिए निरंकुश अंतर्जालीयों के लिए रेड एलर्ट का ईशारा है , तो इस स्थिति में किसी ऐसी खबर का आना कि , बुंदेलखंड के एक ग्रामीण फ़ेसबुकिए ने मुंबई में बैठे अपने फ़ेसबुकिए दोस्त के आग्रह को स्वीकार करते हुए अपने ग्राम के बच्चों , युवकों और समाज के लिए उपहारस्वारूप ज्ञान का खजाना उन तक पहुंचा दिया ।
पिछले दिनों सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर सरकार के खिलाफ़ जो माहौल बना और जो बौखलाहट आम लोगों ने , ध्यान रहे कि अंतर्जाल पर लिखने पढने वाले देश के सबसे पिछडे हुए लोग तो कतई नहीं हैं तो यदि वे सब देख सुन और समझ रहे हैं उसके बाद ऐसी तल्ख प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं तो सोचना ये चाहिए कि सरकार , प्रशासन पर लोगों का विश्वास कैसा है । बजाय इसके कि ऐसे अभिव्यक्ति के मंचों को सही दिशा देकर उनके सार्थक उपयोग को बढावा देने के सरकारें इसके लिए दमन का रूख अख्तियार किए बैठी है ।
ऊपर की खबर बता रही है कि सरकार , प्रशासन , और इन मंचों पर अपने तथाकथित उद्देश्यों को लेकर कलाबाजी लगा रहे तमाम अंतर्जालीयों की रस्साकशी के बीच इन मंचों से जुड रहे युवा सिर्फ़ भटकाव के रास्ते पर ही नहीं हैं ,वे गढ रहे हैं , वे रचना कर रहे हैं , लिख रहे हैं , प्रश्न कर रहे हैं ,बहस कर रहे हैं और अपने वाजिब तर्क रख रहे हैं । अगर दिल्ली पुलिस ट्रैफ़िक व्यवस्था को दुरूस्त रखने के लिए , और उत्तर भारतीय रेलवे अपने जानकारियां साझा करने के लिए इन साइट्स की तरफ़ मुडता है तो ये साबित होता है न कि , यदि चीज़ों को ठीक दिशा में मोडने के लिए ठीक दिशा में प्रयास किए जाएं तो परिणाम राज्य और समाज के हक में ही आएगा ।
सरकारें इन सोशल नेटवर्किंग साइट्स को लेकर क्या रुख अख्तियार करती हैं और न्यायपालिका इसकी कौन सी और कितनी विधिक सीमा तय करती है ये तो भविष्य ही बताएगा किंतु ये तय है कि यदि नकारात्मकता का उभार ज्यादा मुखर रहा तो फ़िर आम जनता को इन साइट्स से हाथ धोना पडेगा ,लेकिन खुद को अभिव्यक्त करने वाली आम जनता कोई न कोई और साधन तलाश ही लेगी । आइए कोशिश करें कि अपनी उपस्थिति से ऐसे मंचों को सार्थक बनाया जाए ।
