ताऊ टीवी चैनल से ताऊ जी से मिला होली का पिरसाद …..ग्रहण करिए
पिछले कुछ सालों में होली के आसपास लकडी पानी बचाने का घनघोर नारा लगाने का रिवाज़ चल निकला है , तो इसका भी तोड है न म्हारे फ़ोडू के पास , देखिए हमारे सूरमाओं ने होली पे हो हल्ला मचा के रख दिया है ..झेलिए इस फ़ेसबुकिया फ़ागुन को …………….
रंगों से खेले लगभग 15 वर्ष हो गए.... और चाह कर भी खेलना संभव नहीं। यहाँ तो अभी कल व परसों भी हिमपात का दिन है।
होली आप सब के जीवन में अनन्त खुशियों के रंग भरे।
अपने मित्रों परिजनों के साथ आप सौ बरस और रंग खेलें और आप पर बीस-पचास रंग हर बरस डलते रहें ... :) रंग भरी शुभकामनाएँ
सुबह से होली की धूम रही
हम एक दुसरे के गालों पर लगा कर
काले, हरे ,सियाह रंग
एक दुसरे के चेहरों को कर बदरंग
नाचते रहे ढोलकी की थाप पर
ढोलकी भी गाता रहा
"चिपका ले सैयां फेविकोल से "
और बेचारा फाग
दूर उदास खड़ा हमें देखता रहा
मैंने बात की तो कहने लगा .......................
अफ़सोस करूँ ये की मुझे भूल गए सब
या यूँ कहूं की लोग मुझे जानते नहीं
फाग .....(फागुन मैं होली पर गाया जाने एक विशेष गीत )
मृदुला
पी के भांग , खा के पुआ , इससे पहिले कि हम हो जाएं लमलेट , और हो जाए लेट,
आप सबको होली ही रंगारंग मुबारकबाद है हो , अब चाहे घोलट जाए इंटरनेट ,
साला पिछली तीन दिन से नाटक पसारे हुए ससुरा ..........
होली खेलकर आये तो देखा फेसबुक इतना धीमा चल रहा है कि एक फोटो लोड करने मे आधा घंटा लग जा रहा है। बोर हो गये अपन तो..:(
बिहार और झारखंड में नॉनवेज खाने की होली आज है .. पूए और मिठाई खाने की कल
"रंग बरसे भीगे चुनर वाली" इतने दिनों से बज रहा है कि सही में ऐसा होता तो गोरी को डबल निमोनिया हो गया होता। :)
एक बर्फीली परत हट जाए तो नव निर्माण या नव सृजन की सम्भावना अवश्यम्भावी है ।
क्या सचमुच....?
शायद होली का उत्सव ऐसी संभावनाओं का आधार है... जिसमें संभावनाओं और संबंधों की पुनर्स्थापना और नव स्थापना के साथ साथ स्वय पर आच्छादित हिम आवरण को त्याग कर एक संतुलन और तादात्म्य स्थापित किया जा सकता है । जीवन में रंग भरे जा सकते हैं ।
रंगोत्सव की अशेष शुभकामनाएं.....
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तमाम शोर, हुल्लड़, उल्लास और जोश के बीच उदासी कहीं दूर नहीं जाती। नीचे की ओर मुंह धंसाकर दिल के किसी कोने में कैद भर हो जाती है। जैसे ही, बैठे, अकेले - यादें, तनहाई और उदासी ख़तरनाक तरीके से तलवारें घुमाते आ जाते हैं, कतरा-कतरा चीरने :(
नशेड़ियो आज 28 तारीख की सुबह हो गई होली गई अब तो होश में आ जाओ
होली के फुटकर संस्मरण
बात अंतर्जाल युग की ही है। मौसम भी कुछ ऐसा ही खुशनुमा था . एक शहर में कुछ काम था -पहुंचा तो मित्रों ने एक गेट टुगेदर रख लिया . कई उपस्थित हुए मगर किसी की अनुपस्थिति प्रमुख बन गयी .उनका कहना था कि उन्हें लोगों की भीड़ में मिलना पसंद नहीं ....बात आयी गयी हो गयी -फिर बहारे आयीं तो मैं अकेला उसी शहर पहुंचा . वे तब भी नहीं आयीं -फिर बात आयी गयी हुई . काफी बाद में उनसे मैंने पूछा क्या इतना विश्वास नहीं है मुझ पर तो बताया कि नहीं मुझ पर तो पूरा विश्वास है मगर उन्हें खुद पर ही भरोसा नहीं था -कहीं भटक जातीं तो ? लीजिये अब इस बात का भी कोई जवाब है ! :-) इस तरह एक फलसफे का अंत हो गया! :-)