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गुरुवार, 22 सितंबर 2016

गद्दार है ABP News चैनल ...




कुछ दिनों से गौर कर रही हूँ ।कुछ नामचीन लेखक/लेखिकाएं मुझे अन्फ्रेंड किये जा रहे हैं ।एक नामी प्रकाशक ने भी अन्फ्रेंड कर दिया ।वैसे भी कभीकभार ही वे लोग मेरी वाल पर आते थे
मैं भी उनके स्टेटस पर नियमित नहीं थी पर जन्मदिन , एनिवर्सरी, किसी खुशखबरी की बधाई जरूर दिया करती थी ...जाने क्या वजह मिली उन्हें मुझे अन्फ्रेंड करने की . 200 से ऊपर म्युचुअल फ्रेंड्स हैं ।अब सब तो उनके स्टेटस पर नहीं पहुंचते होंगे पर ये खुशकिस्मती मुझे ही हासिल हुई कि मेरे नाम पर क्लिक कर बकायदा अन्फ्रेंड किया गया :)
एक शेर याद आ गया
दिल तो चाहता है, सज़दा करे
पर बेनमाज़ी हूँ, झुका नहीं जाता


वैशाली मेट्रो से उतरकर जब आप शॉप्रिक्स मॉल तक जाएंगे तो तीन लेन की सड़क है। इस सड़क का नाम श्री मंजीत ठाकुर मार्ग है। मॉल के सामने से जो सड़के पीएनबी होते हुए मेरे घर तक जाती है उसका नाम श्री मंजीत ठाकुर लेन है। जिनको नहीं पता कृपया जान लें।


Prashant Priyadarshi feeling incomplete.
कभी कभी लगता है यहाँ सिर्फ दो ही किस्म के लोग हैं.
१. जिन्हें लगता है हर समस्या की जड़ मोदी और दक्षिणपंथी संगठन हैं.
२. जिन्हें लगता है हर समस्या की जड़ वामपंथी हैं.


हाइबरनेशन में पड़ी पुरानी पोस्टों को लाइक या कमेंट कर ज़िंदगी देने वाले दोस्तों को सलाम.

डेंगू चिकुनगुनिया अपडेट -- कल IMA में हुए एक पैनल डिस्कशन से :
दोनों ही रोग मच्छर के काटने से होते हैं जो साफ पानी में पनपते हैं। इसलिए बचने का एक ही उपाय है कि घर में और आस पड़ोस में पानी इकठ्ठा न होने दें। विशेषकर छोटी छोटी चीज़ें जैसे गमले के टूटे टुकड़े , छत पर पड़े टूटे फर्नीचर या अन्य वस्तुएं जिनमे थोड़ा सा भी पानी जमा हो सकता है , मच्छरों के पनपने के लिए काफी हैं। इसलिए समय समय पर निगरानी करते रहना ज़रूरी है। ज़मीन पर या नालियों में कहीं पानी का भराव है तो उसमे मिटटी का तेल या टेमीफॉस दवा डालने से मच्छरों के लार्वा मर जाते हैं।
डेंगू वायरस के ४ स्ट्रेन होते हैं - १,२,३,४ । १ और ३ स्ट्रेन कम खतरनाक होते हैं जबकि २ और ४ स्ट्रेन से ज्यादा गंभीर रोग हो सकता है। पता चला है कि दिल्ली में इस बार १ और ३ स्ट्रेन से डेंगू हुआ है , इसलिए इस बार डेंगू का प्रकोप कम है। एक बार एक स्ट्रेन से डेंगू होने पर उम्र भर के लिए उस स्ट्रेन से रक्षा रहती है। लेकिन किसी अन्य स्ट्रेन से डेंगू होने पर रोग ज्यादा गंभीर हो सकता है। इसलिए डेंगू से बचाव बहुत आवश्यक है।
चिकुनगुनिया एक बार होने पर जिंदगी भर दोबारा नहीं होता। लेकिन किसी भी वायरल बुखार में जोड़ों में दर्द दोबारा हो सकता है। वैसे यह रोग सिर्फ दर्द ही देता है , मृत्यु नहीं। लेकिन साथ में अन्य पुराने रोग हों तो स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। दोनों ही बुखार में सिर्फ पैरासिटामोल की गोली लेनी चाहिए और द्रव पदार्थों का सेवन खूब करना चाहिए ताकि पानी की कमी न हो। तेज बुखार में पानी की पट्टियां बहुत काम आती हैं। कोई अन्य दवा डॉक्टर की सलाह पर ही लेनी चाहिए।
( सड़क पर एक नेताजी का बोर्ड लगा है , जिसपर लिखा है -- मच्छरों से बचें , डेंगू चिकुनगुनिया न होने दें )



एक झोले में सब कुछ है। अपड़ा-कपड़ा, भगवान और दूसरे झोले में पानी का जग, खाने का सामान। उम्र 75 साल, भेष साध्वी का। जौनपुर से चढ़ी हैं, काशी जाना है। कहीं रामायण से आ रही हैं। शरीर कमजोर नहीं है, तनकर बैठी हैं। 14 बरस से छोड़ दी हैं घर-द्वार। बोले जा रही हैं...जब नहीं रहे भतार तो साथ हैं भरतार। वही भरता है, वही तार से तार जोड़ता है। पूछता हूँ...बीमार पड़ गईं तो? तपाक से दाहिने हाथ की तरजनी ऊपर कर बोलती हैं... वो नहीं है? वो नहीं देखेगा? मरने से पहिले हमको चारपाई पर रखेगा? बीमार करेगा तो कहाँ रहेगा? करेगा न कुछ व्यवस्था। पूर्ण आत्म विश्वास से भरी सुना रही हैं शिव भजन...आदि शंभु स्वरुप मुनीवर, चंद्र शीश जटा धरम....।
कोई नहीं है साथ, कोई नहीं घर बार, साथ है तो ईश्वर के प्रति गहरी आस्था, भक्ति और इसी के प्रभाव से दमकता, चमकता चेहरा। 'लोहे का घर' रोज कुछ नया दिखाता है, रोज कुछ नया सुनाता है।


पता नहीं किस कोण से देखता है कि उसे मुझमें असाधारणता दिखती है... फिर किसी साल के एक लम्‍हे मेरे एक और दोस्‍त पर हैरान होता है कि पता नहीं कैसे झेलते हो.. इतना औसत व्‍यक्ति तुम्‍हारा दोस्‍त कैसे हो सकता है? मैं बस उसकी हैरानी पर हैरान हो सकता हूँ... दोस्‍त बनाने के लिए आइंस्‍टाइन खोजने चाहिए थे?... वे जो वहॉं थे, बिना कहे थे अपनी समूची औसतता के साथ थे जहॉं मेरे साथ होना चाहिए था... वे तब भी जब मैं तुम्‍हारे साथ खड़े होने के कारण ग्रैंडनेस के पैथोजेन्‍स का कैरियर था और उनके लघुता में दबने की आशंका थी तब भी तमाम अपमान की आशंका के बावजूद वे खड़े थे मेरे साथ...
मैं इस औसतता को किसी विराटता के पासंग नहीं रखूंगा...मेरा जीवन तो औसतता का ही उत्‍सव है। असाधारणता का रोग क्षणों की व्‍याधि है बीत जाएगी।


रात भर जागते हुए नींद को ढूँढा किये
जाने कब नींद आई, सुबह हाथ से निकल गई ...


ये है साउथ ब्लॉक ...
यहीं है प्रधान मंत्रीं का ऑफिस
यहीं पर है भारत का वॉर रूम
मोदी ने यहाँ दो घण्टे बिताया
अजित डोभाल और जल थल वायु सेना प्रमुख रहे उपस्थित
सूत्रों के मुताबिक एक पावर प्वॉइंट प्रेजेंटेशन हुआ
ख़ुफ़िया सूत्रों से पता चला है आतंकी आकाओं को निपटाने की तैयारी चल रही है (छुप जाओ सब)
सूत्रों में मुताबिक सरकार का सब्र टूट चुका है....
अब कोवर्ट ऑपरेशन की तैयारी चल रही है...
---एबीपी न्यूज़
.... ये है भारत की मीडिया रिपोर्टिंग
.... पकिस्तान को अब भी जासूसों की क्या ज़रुरत है ?
.... इन चैनलों की जाँच होनी चाहिए कि इनके 'ख़ुफ़िया' ' और 'उच्च स्तरीय सूत्र' क्या हैं और कौन लोग हैं जो सरकार की हर नीति और हलचल की जानकारी मीडिया को दे रहे हैं ?



बड़ा सलीका सिखाते हैं राह चलते लोग
कि औरों को गिराके खुद को उठाएँ कैसे .......रत्नेश


जब ज़िन्दगी सर के बल खड़े होने की ज़िद पर उतर आए तो आप बस चुपचाप उसके पाँव पकड़ के खड़े रह सकते हो
ताकि हड्डियाँ न टूटें।


मेरा अपना अनुभव है मानना न मानना आपकी मर्ज़ी है, कोई भी बीमारी तब ही अच्छे से अटैक कर पाती है जब मन कमज़ोर पड़ जाता है, मन में विश्वास भरके एक्सरसाइज़ करना न छोड़ें, सुबह-शाम साँसों का अभ्यास और साथ में नीम,गिलोय,एलोवेरा, तुलसी, अदरक, काली मिर्च का काढ़ा बनाकर पी जायें, ठण्डी चीज़ें खाना छोड़ दें, गरम चाय दूध के साथ पतली खिचड़ी व दलिया... चिकनगुनिया पैर दबाकर भाग लेगा, हाँ हाथ पैरों का दर्द कुछ समय रहेगा, लेकिन नियमित व्यायाम से वह भी ठीक होगा ही होगा... जल्दी ठीक होना चाहते हैं तो आज़माये, मै काफी ठीक हूँ.. जल्दी ही आते हैं नई सेल्फी के साथ...।


नवाज़ शरीफ : पाकिस्तान आतंकवाद से पीड़ित है.
डेंगू मच्छर : मुझे तो खुद चिकनगुनिया हो गया है.




आजकल AAP के विधायक जब भी मिलते हैं तो एक-दूसरे को hello कहने के बजाए पूछते हैं....और कब छूटे?

 

लोक -कल्याण मार्ग नामकरण सराहनीय और स्वागत योग्य है । लोकतांत्रिक देश के प्रधानमंत्री का सरकारी निवास जिस मार्ग पर है , वहां से लोक -कल्याण का ही सन्देश पूरे देश में जाना चाहिए इसलिए यह एक सार्थक नामकरण है । रेसकोर्स रोड जैसा नाम आभिजात्य वर्गीय अंग्रेजी मानसिकता का प्रतीक था और इस नाम से उस जमाने की याद आती थी ,जब देश पर अंग्रेजों का अवैध कब्ज़ा हुआ करता था । अब लुटियन जोन का नाम भी बदल देना चाहिए , क्योंकि इस नाम से लगता है कि यह लुट चुके लोगों और लुटेरों का इलाका है । लोक कल्याण मार्ग की तरह इसका नाम लोक हितैषी परिक्षेत्र कर देना चाहिए । क्या ख़याल है ज़नाब का ?
कुछ ऐसे मीर जाफर आज भी हमारे बीच हैं जो भारतीय सैनिको की शहादत पर भीतर भीतर खुश हो रहे और दिखावे के तौर पर मोदी को कोस रहे। इनकी चले तो भारत पर इस्लामिक बम ही फोड़ दें। दरअसल अपवादों को छोड़ दें तो हिन्दू मुस्लिम के बीच की खाईं बहुत गहरी है और यह कयामत पर ही पटेगी। वैदिक काल की कौम कैसे दो ध्रुवों में बटती गई और छठी सदी आते आते एकदम विरोधी हो गई एक गहन अनुसंधान का विषय है।
यहां तक की रोजमर्रा की गतिविधियों में खाने पीने पूजा इबादत साफ सफाई में एक उत्तर तो दूसरा दक्षिण। सूर्य चांद तक का और जानवरों तक के बंटवारे हो गए। एक के लिये गाय माता दूसरे के लिये भोज्य। एक के भगवान के कई रुप तो दूसरे के निराकार। एक के लिये गंगा तो दूसरे के लिये आबे जमजम।
हम कभी एक नहीं हो सकते। कोई सूरत नज़र नहीं आती😯

जमूरे !
जी वस्ताद !
तमाशा दिखाएगा ?
दिखाएगा ।
लोगों को हँसाएगा ?
हँसाएगा ।
पाकिस्तान चला जा ।
चला गया ।
वापस आ जा ।
आ गया ।
क्या देखा ?
उधर की फ़ौज़ इधर बीस किलोमीटर घुस गयी है ।
दिखती क्यों नहीं ?
इधर पाकिस्तानी चैनल नहीं आते ।
अपनी वाली उधर दिखी क्या ?
उधर हिन्दी चैनल नहीं आते ।


आज के लिए इतना ही ................

गुरुवार, 15 सितंबर 2016

मेरे दोस्तों की खूबसूरत सी बातें ..



अब ये जरूरी तो नहीं कि दोस्त जो भी कहें उसके लिए उन्हें ब्लॉगपोस्ट तक पहुंचना  ही पड़े | असल में मित्र सूची में इतने गुनी और कमाल की प्रतिभा के मालिक लोग हैं कि मन करता है एक एक शब्द को सहेज लिया जाए , कुछ को साझा कर लेता हूँ अपने और अपने मित्र समूह के लिए , यही सोच कर ब्लॉग्गिंग में भी और ब्लॉग पोस्ट में भी दोस्तों की बतकही , दोस्तों के सपने , दोस्तों की ठिठोली , दोस्तों का गुस्सा , दोस्तों का प्यार सब कुछ सहेज लेता हूँ यदा कदा ...समय समय पर खुद भी पलट के पढूं तो आनंद दूना तिगुना होता जाता है ......मित्रता जिंदाबाद , दोस्त जिंदाबाद



कुल मिलाकर दुनिया में आपका सबसे अच्छा और सच्चा मित्र वहीं है जो iPhone 6S या iPhone 6S Plus गिफ्ट कर दे. आज ही दाम 22 हजार रुपये कम हुआ है. पृथ्वी वीरों से खाली कब रही है!


गंदे पानी में नॉर्मल मच्छर पनपता है। साफ पानी में डेंगू का मच्छर पनपता है। सवाल ये है कि पानी को कितना गंदा रखा जाए कि मच्छर पैदा ही न हो।


Samvedna Duggal feeling awesome.
आज पहली बार बैठी हवाई जहाज़ में ..!!
बादलों के बीच ढूंढती रही अपने सपनों के चाँद, सूरज, तारे ..और ....



"जहाँ ज़रूरत हो माफ़ी माँगो लेकिन माफ़ करने की जगह वहाँ भी रखो जहाँ बहुत ज़रूरी नहीं. संसार के बड़े सारे लेन-देन हैं, सो उन्हें चुकता करते चलो. थप्पड़ तुमने पहले भी बहुतेरों को रसीदे हैं, आगे भी कहीं वक़्त- मौक़ा पड़ जाए तो रसीदने से न हिचकना. ये उस बड़े से लेन-देन का ही छोटा-सा हिस्सा है. क्या हम पहले ही इस बात पर चर्चा नहीं कर चुके हैं कि शाओलिन आत्मरक्षा की विधि नहीं बल्कि ध्यान का ही एक चरण है ? अपने शाओलिन चरणों में सजगता से उतरो.
बाक़ी अपने शान्ति के क्षणों में उन सब को प्रणाम करते चलो जो तुम्हारे लिए ये परिस्थितियाँ गढ़ रहे हैं. आगे भी गढ़ेंगे. सारे लोग, सारी परिस्थितियाँ गुरू हैं. समय गुरू है. सबक पक्की कॉपी में दर्ज करते चलो. सबको धन्यवाद देते चलो."
बीते हफ़्ते माँ ने मुझसे ये बातें कहीं.
**
सितम्बर की इस दोपहर मन भरा-भरा और मौसम हरा-हरा है. गणपति को विदाई देती सड़कें भीग रही हैं. इधर मेरे कमरे के झीने अँधेरे को मुंशी खान की आवाज़ की मद्धम रौशनी चीर रही है. हवाओं की ख़बर पर यक़ीन करें तो साँझ ढलने के पहले मुहब्बत का कोई फ़रिश्ता दरवाज़े पर दस्तक देगा. शुक्रिया और सलामी का इससे मुफ़ीद वक़्त भला क्या होगा ?
सभी मित्रों-अमित्रों, कुमित्रों-सुमित्रों व विश्वामित्रों तक बाबुषा का धन्यवाद व प्रणाम पहुँचे.
【मम्मम् शरणम् गच्छामि】




मुलायम- तू हम्मसे चाताका है? (तू हमसे चाहता क्या है?)
अखिलेश- कुन्नैह (कुछ नहीं)



कल मेरे ऑफिस में अमेरीका निवासी जो यहाँ पिछले पाँच साल से रह रहे हैं आये... ब्रॉड स्कोट... जी कुछ देर उनके सवालों का जवाब अंग्रेज़ी में देती रही अचानक उन्होंने पूछा,"आप कहाँ की रहने वाली हैं, इंडिया में वाइफ़ को पति का सरनेम लिखना होता है लेकिन आपने अपना नाम सुनीता शानू बताया है मिसेज पवन, आपने एेसा क्यूँ किया? सबसे पहले तो यह सवाल मेरे लिये अप्रत्याशित था, दूसरे किसी अंग्रेज़ के मुँह से इतनी अच्छी हिन्दी सुनना सचमुच बहुत अच्छा लगा, मैने कहा मेरी मर्ज़ी है मै सुनीता चोटिया लिखूँ या शानू लिखू...शायद मेरी मर्ज़ी शब्द उन्हे रूचिकर नहीं लगा, या पहली बार सुना हो, कई बार मेरे शब्दों को दोहराते हुये उन्होंने कहा... आई लव इंडिया, मुझे बहुत पसंद है... तो ठीक है चाय के साथ बिस्कुट चलाइये कहें तो छोले भटूरे भी मँगवा दें, कोई हमारी माँ से प्रेम करे तो मेहमान नवाजी में हर भारतीय पीछे नहीं हटते... जय हिन्दी।


'मृत्युंजय पढ़ते हुए एक ख्याल आया था ....इसमें जिक्र है कि कर्ण रोज स्नान करने के बाद हीरे, मोती,जवाहरात दान किया करते थे ।
जब वे युद्ध मैदान में घायल पड़े थे और मृत्यु के समीप थे तो उन्होंने सुना..एक वृद्ध रोते हुए कह रहा था ,' मैं युद्ध में शहीद अपने पुत्र का अंतिम संस्कार कैसे करूँ, मेरे पास कुछ भी नहीं है ...कर्ण होते तो उनसे धन मांग लेता ।उनसे कई बार धन दान लिया है '
कर्ण भी वृद्ध को पहचान गए ।उन्होंने कई बार उस वृद्ध को दान दिया था ।पर अभी उनके पास कुछ नहीं था ।उन्होंने अपने पुत्र से कहा कि एक पत्थर लेकर मेरा दांत तोड़ दो और उसमें लगा सोना उस वृद्ध को दे दो ।ऐसा ही किया गया ।
कर्ण की दानशीलता प्रसिद्ध है पर एक सवाल उठता है मन में ।बार बार दान लेने के बाद भी कोई गरीब कैसे बना रह सकता है ।और राजा को रोज धन दान करने से बेहतर ये उपाय नहीं करने चाहिए थे कि कोई गरीब ही ना रहे ।किसी को हाथ ही ना फैलाना पड़े ।
एक पुरानी पोस्ट जिसमें जिक्र है कि एक सज्जन सड़क पर रहने वाली एक बूढी महिला को रोज चाय नाश्ता देते हैं ।कई वर्षों से सड़क पर रहते कुछ वृद्ध -वृद्धाओं को लगातार देख रही हूँ ।वे साफ़ कपड़ों में स्वस्थ दिखते हैं ।इसका अर्थ हमारी कॉलोनी वाले उनका अच्छी तरह ख्याल रख रहे हैं ।अब राजा तो हैं नहीं कि उन्हें घर और कारोबार मुहैया करवाएं ।हम लोग बस इतना ही कर सकते हैं ।




दिल्ली की ज़ीरो-सीट पार्टी की छटपटाहट ग़ज़ब है
बेचारे माकन को हर रोज़ कोई नया बहाना ढूंढना होता है टीवी पर दिखने का.
और अभी चुनाव भी इतने दूर हैं कि लगता है, तब तक तो पूरा ख़र्च हो लेगा ये


"मुद्दते बीत गई ख्वाब सुहाना देखे;
जगता रहता है हर नींद में बिस्तर मेरा!"



खबर: एप्पल के स्टोर पर बुधवार से ही लोग बोरा बिस्तर और तंबू लेकर लाइन में लग जाएंगे ताकि शुक्रवार को फोन पा सकें....
वाकई में सही बात है कि जब तक सलीमा और मोबाइल रहेगा... लोग बेवकूफ बनते रहेंगे... (रमाधीर सिंह साहब से क्षमा सहित ;) )





 
ज़िन्दगी.... एक चिट्ठी से दूसरी चिट्ठी तक का इंतज़ार भी होती है.....!



घर का कम्प्यूटर बिगड़ जाए
तो माता-पिता कहते हैं
बच्चों ने बिगाड़ा है
और अगर बच्चे बिगड़ जाएं
तो कहते हैँ
कम्प्यूटर ने बिगाड़ा है।



मने शिवपालगंज के कुसहर प्रसाद को उनके बेटे छोटे पहलवान ने परंपरानुसार फिर एक लाठी जमा ही दी। महीने में एक दो बार टुर्र-पुर्र के चलते लाठी जमाने की फ्रिकवेंसी बरकरार है। कुसहर घायल होने से हाहू हाहू करते चले जा रहे हैं.....तिस पर अपने बेटे की ताकत का बखान सुन प्रसन्न भी हो रहे हैं।
.....और छोटे पहलवान कह रहे हैं -
"गुरु, बाप जैसा बाप हो, तब तो एक बात भी है" !


समाचार चैनलों को देखते हुए जब स्पीड न्यूज, बुलेट न्यूज, एक मिनट में 5 न्यूज 10 न्यूज.. टाइप कार्यक्रमों से पाला पड़ता है तब फिल्म 'अमर अकबर एंथोनी' का यह डॉयलॉग खूब याद आता है-
"ऐसा तो आदमी लाइफ में दोइच टाइम भागता है, ओलंपिक का रेस हो या पुलिस का केस हो । "


उनके बीच मतभेद इस कदर बढ गये कि उन्होंने बयान जारी कर दिया - ’हमारे बीच कोई मतभेद नहीं है ।’


इक गुज़ारिश है अगर मानो तो
क्या हक़ीक़त है पहले जानो तो
दर-ए-ख़ुल्द वा है आप ही के दर से
अपने अंदर के ख़ुदा की जो मानो तो.... विजय "अंजुमन"



इस दुनिया में जो भी चीज़ें दिखती हैं / विद्दमान हैं ,उन्हें या तो 'ईश्वर' ने बनाया है या 'इंजीनियर्स' ने । अब आगे क्या कहें ,बधाई तो बनती है 'आज' की ।


इसी सप्ताहांत से बहुत समय से बंद पड़े कालम "ब्लॉग बातें " ..जिसमें किसी एक विषय पर लिखी गयी बहुत सारी ब्लॉग पोस्टों की उन ब्लोग्स के पते और ब्लोगर के नाम के साथ ,उद्देश्य सिर्फ आम पाठकों ,प्रिंट व् अन्य माध्यमों ,तक ब्लॉग सूत्रों को पहुंचाना .....एक तरह की लघु रिपोर्ट ...साप्ताहिक रहेगी ..फिलहाल हिंदी दिवस और हिंदी पर लिखी पोस्टों की कतरनों को संभाल रहा हूँ ....हिंदी ब्लोगिंग के लिए लिए बहुत कुछ किया जाना शेष है , जिसमें सबसे पहला है ,,,हिंदी में ब्लॉग्गिंग करना ....ब्लॉग पोस्ट तो हम लिख ही रहे हैं .....मगर ब्लॉग्गिंग में फर्क है .....फिर हिंदी में तो अभी हम वर्गीकृत भी नहीं हुए हैं विशेषज्ञता तो बहुत दूर की बात है ....

शनिवार, 5 दिसंबर 2015

ये चेहरे कुछ न कुछ कहते हैं ....






मलाई का हलवा :
ये आपको किसी हलवाई की दुकान पर नहीं मिलेगा । खाने के लिए संपर्क करें ।



हम पे सोने का पेन था जब तक
सब खतों के जवाब आते थे
तितलियां भेजते थे हम खत मे
और उधर से गुलाब आते थे
फ़हमी बदायूनी


अयोध्या में हनुमान गढ़ी से लेकर जन्मभूमि तक पतली गली जैसी सड़क है जिसके दोनों तरफ दुकानें हैं जिनमे टीन शेड लगाने से गली पतली हो गयी है... 2 नवम्बर 1990 को कारसेवकों का जत्था उन्हीं गलियों से भजन गाते, जयकारे लगाते जन्मभूमि की ओर बढ़ रहा था... दोनों तरफ टीन शेडों और छतों पर हज़ारों पैरा मिलिट्री फ़ोर्स और पुलिस वाले सशस्त्र खड़े थे। ऐसे समय में मुलायम सिंह ने गोली चलाने का आदेश दिया... गलियों से बाहर भागने का कोई रास्ता नहीं था... दोनों ओर छतों से गोलियाँ बरस रही थीं... कोई नहीं बचा... जो दुकानों में घुसे उन्हें पुलिस ने बाहर खींच कर गोली मार दी... रात भर ट्रकों में लाशें अज्ञात स्थानों और सरयू में फेंकी गयीं.... सरयू का पानी स्वयंसेवकों के लहू से लाल हो गया... लोग पूरे भारत से आए थे... इस लिए किसी की शिनाख्त नहीं हुई... सरयू में पानी बह गया... ये जघन्य सरकारी नरसंहार विस्मृति में दब गया...वही आततायी फिर से सत्ता पर काबिज़ अट्टहास कर रहा है... कहता है ज़रुरत पड़ी तो फिर चलवाऊंगा गोलियाँ... सहिष्णुता के पुजारी मौन हैं.... लेकिन कारसेवकों के नरसंहार का जवाबदेह कौन हैं ?



समाचार चैनल हों या सोशल मीडिया बेवजह के मुद्दों का शोर ही सुनने को मिलता है । अज़ब- गज़ब से मसलों पर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की आक्रमता और सोशल मीडिया की गैर जिम्मेदार अफवाहें देखते ही बनती हैं । देश में कोई प्राकृतिक विपदा आये या आतंकी हमला हो जाए, इन्हें कोई लेना देना नहीं । बस, आये दिन कोई ना कोई ऐसा मुद्दा खड़ा कर दिया जाता है जो आमजन की समस्याओं को लील जाता है । समस्याएं, जिन्हें सही मायने में सरोकार भरी बहस और हल की दरकार है ।
रोज एक नया मुद्दा उछलता है और फिर गुम हो जाता है । बिना किसी सार्थक बहस और निष्कर्ष के । दुखद पहलू ये कि यह प्रवत्ति कम होने की बजाय बढ़ती ही जा रही है । जबकि देश के समक्ष आज अनगिनत गंभीर मसले मौजूद हैं, नीतिगत निर्णय अटके पड़े हैं , जिनके बारे में सोचा जाना आवश्यक है ।


मैंने आँखें बिछायीं मगर आई ना, खुद को देखूँ तो डसने लगा आईना
आई ना आई ना शोर करता रहा, सुनके सचमुच दरकने लगा आईना
आई ना ना वो करते मेरे पास जब, सच कहूँ आई ना प्यास मिलने की तब
वो तो आकर के समझो अभी आई ना, मन के भीतर सिसकने लगा आईना



वाणी गीत feeling Greatful.

तुम
एक से नौ की
कोई संख्या
मैं तुम्हारे बाद का शून्य!
मैं शून्य ही सही
बस तुम्हारे बाद हूँ!!
बहुत दिनों बाद कुछ उपजा. कल किसी अपने ने "कैलीबर " याद दिलाया.




हमारे विकसित शहरों, महानगरों की सड़कों और गलियों में बरसात के पानी से हाहाकार मच जाता है पर वो दिन भी थे औरबिहार के एक जिले के वैसे छोटे से टाउनशिप में भी रहना हुआ जहां रात की भरपूर बारिश के बाद सामने का बड़ा मैदान सुबह सुबह अरब सागर, हिन्द महासागर सा लगता था,सड़क के साथ लगी हर छोटी बड़ी खाली जमीन पानी से लबालब, स्कूल से वापसी में जूते हाथ में हुआ करते और शौकिया रोड छोड़कर पानी भरे फील्ड में छपाछप। पानी जितनी जल्दी जमा होता उतनी ही जल्दी खाली भी, सत्तर के दशक में वहां एक बार बाढ़ आयी थी, रोड पर नाव चलने और छत पर खाना बनाने के किस्सों के बीच गुस्सा आता, हमारे टाईम में गंगा के किनारे गुप्ता बांध क्यों बना दिया गया, अब शहर में बाढ़ जैसा पानी नहीं आता जबकि वो केवल इम्बेकमेंट था कई बार बगल के एक गांव महना होते हुए गुप्ता बांध से गंगा का प्रवाह देखने जाया करते थे, पता नहीं अब क्या हाल है लेकिन बरसात के बाद पानी जमा होने से छई छप्पा समेत जितने तरह के खेल खेले जा सकते थे हम खेलते थे, अंजूरी में छोटी-छोटी मछलियां और टेडपाल भरकर मां को अपना अचार वाला बोईयाम देने की आवाज लगाते थे, लेकिन ये तब की बात है जब हमारे शहर 'विकसित' नहीं हुए था और बरसने वाला पानी एक डर एक "प्राब्लम" नहीं था।

बहुत दिन होने को आए किसी ने कुछ लौटाया नहीं...!

चेन्नई आपदा के लिये आपलोगों से एक अनुरोध.. 18 दिसंबर को आ रही शाहरूख की मूवी दिलवाले को ना देखकर टिकट के 150 रूपए चेन्नई आपदा के लिये प्रधानमंत्री राहत कोष में जरूर दे.. आपकी यह एक छोटी पहल आगे पहाड़ बनेगी।



एक ख्याल यूँ ही ,,,,,,,,,
===========
इश्क की तन्हाई
शाख़े उम्मीद पर पनपती आशनाई
होती है ख़ार की मानिंद
चाहे लिख डालो दर्ज़नो रुबाई
राजेश सिन्हा,,,,,,,
 
 

पहला पराठा खाते समय स्वाद की अनुभूति ... दूसरा पराठा खाते समय सुकून का एहसास .... और तीसरा पराठा खाते समय - हे पराठे तुम कब खत्म होओगे ... 😎 😊 😇


अद्भत है न यह शेर-
कितने दिलकश हो तुम, कितना दिलजूं हूँ मैं
क्या सितम है कि हम लोग मर जायेंगे
-जॉन एलिया



तुम क्या गईं
मैं बेसुरा हो गया
जीवन-संगीत और वस्तुगत आकर्षण
सब बुरा हो गया
मैं पँक्तियों के खो जाने पर भी रोया हूँ
तुम तो समूची स्त्री थीं

[ अविनाश मिश्र ]



मुख्यमंत्री जी विधानसभा में ...
केंद्र सरकार भ्रष्ट है जी ,
कांग्रेस भाजपा भ्रष्ट हैं जी,
दिल्ली पुलिस भ्रष्ट है जी,
बिजली बोर्ड , जल बोर्ड भ्रष्ट हैं जी,
नगर- निगम वाले भ्रष्ट हैं जी
योगेन्द्र -प्रशांत , भ्रष्ट हैं जी ,
ACB -Lt. Governor , भ्रष्ट हैं जी
ऑटो वाले भ्रष्ट हैं जी.....

कोर्ट, इनकम टैक्स, डीडीए, ...........सब के सब भ्रष्ट हैं जी ...
दिल्ली में कुल ईमानदार ....सिर्फ 67 MLA हैं जी