Followers

रविवार, 24 मार्च 2013

किताबें बहुत पढी होंगी तुमने ,कभी कोई चेहरा भी तुमने पढा है



सोचता हूं कि इस  कंप्यूटर और उस पर उपलब्ध इन मंचों ने हमें खुद को अभिव्यक्त करने का न सिर्फ़ मौका दिया है बल्कि उन्हें व्यक्त करने के अलग अलग अंदाज़ भी दिए हैं । फ़ेसबुक पर हम स्टेटस और फ़ोटो भी भुकभुक कर देते हैं , ट्विट्ट एक चालीस की लोकल कट्टर है , लिंकदीन अलादीन का भाई है और , एक नयका आया है न क्या तो नाम है ससुरे का..छोडिए जो भी है , तो इन सब भी अपना अलग अलग आनंद है । ब्लॉगिंग का अलग और फ़ेसबुक का अलग ..जब फ़ेसबुक पर हम अपने तमाम ब्लॉग्स और पोस्ट को साझा कर सकते हैं तो फ़िर ब्लॉग्स पर फ़ेसबुक को क्यों नहीं , बस यही सोच कर इस ठिकाने को बना लिया । चलिए अब आपको दिखाते पढाते हैं कि फ़गुआ से पहले कौन क्या कह सुन रहा है ....


रंगरेज़ मेरे तू रंग दे ...
हाँ एक रंग में रंग दे ..
सब प्रेम रंग में रंग दे ...
--
होली है ....

 
जिसको पाया ही नहीं..उसको खोने से क्या डरना
 
 
ये मैच ढाई दिन मे खत्म हो गया अगर बाकी बचे ढाई दिन में एक और मैच खेल लिया जाए तो आस्ट्रलिया चार मैचों की सीरीज पांच शून्य से भी हार सकता है।
 
 
  • हिंदी टप्पा
    ======
    उद्घाटन की पड़ी आजकल,.....उनको ऐसी चाट।
    बीवी की चोटी का फीता, कभी कभी-कभी दें काट॥
    कि मैं कोई झूठ बोलया? कि मैं कोई कुफर तोलिया?
    कोई... न!! भाई कोई न...!! भाई कोई न...!!
    ============
    सद्भावी-डॉ० डंडा लखनवी

 


अजीबोगरीब स्थिति हो गयी है मेरी ,अभी देखहरू बन कर एक जने के यहाँ जाना है लड़का पसंद करने ,जबकि ये सब काम मुझे बेहद नापसंद है ,बहुत जरुरी है विवाह का अधिकार परिजनों के हाँथ से निकलकर लड़के -लड़कियों के हाँथ में चला जाए ,सारी टीटीमेबाजी तो ख़त्म होगी ही ,विवाह से जुडी विसंगतियां भी दक्खिन लग जाएँगी |
 

 

मंज़िल जरा भी दूर नही थी उस निशान से,
थक के गिरा था जहाँ परिन्दा उड़ान से,
बारिश की दुआ इसलिए मैं माँगता नही कि-
दरिया बहुत क़रीब है मेरे मकान से,
 
 
जोली एल एल बी .....सच्चाई को दिखाती मूवी .....पास है जी पास
 

 

 

 

अभी अभी एक मित्र ने बताया कि इटली ने दोनों नौसैनिकों को इसलिए वापस भेजा क्योंकि भारत की तरफ से धमकी दी गई थी कि अगर दोनों को तुरंत वापस नहीं भेजा गया तो भारत काटजू और बेनी प्रसाद वर्मा को वहां भेज रहा है ।इटली इतना बड़ा जोखिम लेने की स्थिति में नहीं था :-) :-)
 

 

 
दिग्विजय सिंह का कहना है कि 33 साल के संजय ने जब अपराध किया तब वो बच्चे थे। मैं सोचता हूं राहुल गांधी ने किस हद तक बच्चों की परिभाषा बदल दी है।

होली हो या दिवाली
बढाती है हमारी ही जिम्मेदारी ,
सब कुछ हो चाहे बंद
हमारी वर्कशॉप (रसोई) में
बढ़ जाती है कलाकारी .
प्रोडक्शन और सप्लाई

ओवर टाइम भी शुरू हो जाता .

बदले में कुछ नहीं चाहिए ,

सबको होली की शुभकामनाएं !

 
 
  • मैं सोना चाहता हूँ।
    ऐसी नींद जो आगोश में भर ले मुझे
    दीन-दुनिया की खबर हो ना मुझे,
    आँख से हर ख़्वाब खोना चाहता हूँ
    मैं सोना चाहता हूँ,मैं खोना चाहता हूँ।।

  •  
     

     

     

    ऐसा तो कही नही होता है
    उल्फत में एक ही रोता है
     हर हाल में इंसा सिसकेगा
    गर दर्द उसका इकलौता है

 
लगभग एक साल से साइट पर लिखते रहने के बावजूद अभी तक ब्लॉग पर लिखने मोह बना हुआ है , मैंने ब्लॉग्स पर लिखना बिल्कुल बंद कर दिया था और तमाम ब्लॉग्स को भी रिडायरेक्ट करके साइट की तरफ़ मोड दिया गया था , किंतु पिछले दिनों से महसूस हो रहा है कि उस दुनिया को यूं छोडना ठीक नहीं है , जल्दी ही सभी ब्लॉग्स को पुन: सक्रिय करके वापसी करने का विचार बना रहा हूं और उससे भी ज्यादा ब्लॉग्स को पढने और उन पर टीपने की आदत को मांजने की भी ...ब्लॉगिंग जिंदाबाद , ब्लॉगर जिंदाबाद , ब्लॉग्स जिंदाबाद ।
 

6 टिप्‍पणियां:

  1. प्रभावशाली ,
    जारी रहें।

    शुभकामना !!!

    आर्यावर्त

    आर्यावर्त में समाचार और आलेख प्रकाशन के लिए सीधे संपादक को editor.aaryaavart@gmail.com पर मेल करें।

    उत्तर देंहटाएं
  2. आज की ब्लॉग बुलेटिन होली आई रे कन्हाई पर संभल कर मेरे भाई - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत ही बढिया ...
    होलिकोत्‍सव की अनंत शुभकामनाएं

    उत्तर देंहटाएं

पोस्ट में फ़ेसबुक मित्रों की ताज़ा बतकही को टिप्पणियों के खूबसूरत टुकडों के रूप में सहेज कर रख दिया है , ...अब आप बताइए कि आपको कैसी लगे ..इन चेहरों के ये अफ़साने