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मंगलवार, 6 सितंबर 2011

कुछ चेहरे यूं कहने लगे .....फ़ेसबुक अपडेट





देखिए कि आजकल दोस्त क्या फ़रमा रहे हैं ...



कुछ नहीं गले का पट्टा खोल दिया है, इसलिये फ़िर से भोंकना शुरू हो गया है।
 
केश फॉर नोट कांड में बिकाऊ लोग व दलाल तो फंस गए पर खरीददार नहीं फंसे आखिर खरीददार पवित्र परिवार के नुमाइंदे जो ठहरे !!!
 


अपनी तो आशिक़ी का किस्सा ए मुख़्तसर है
हम जा मिले ख़ुदा से दिलवर बदल-बदलकर।
 



मेरे सब्र के लिए मुझे थैंक्यू तो बोल
तेरा नंबर तो है, मगर एक काल भी नहीं


बहुत आवश्‍यक, मोस्‍ट अर्जेन्‍ट : रागी कहां मिलेगी या मिलेगा। दक्षिणी दिल्‍ली में हो तो बेहतर। नेहरू प्‍लेस के पास हो तो बहुत बेहतर। वैसे यह कर्नाटक में मिलता है। दिल्‍ली में कहां कहां पर मिलता है मालूम नहीं परंतु चाहिए। डॉक्‍टर ने बतलाया है।
 
फेस बुक पर अपनी पुरानी हरकतें, अपनी वाल पोस्ट और अपने कमेंट्स देख कर अपनी बेवकूफी पर हँसी भी आती है और शर्मिंदगी का अहसास भी होता है.

ये मुई फेस बुक भी असल जिन्दगी का रुप अख्तियार कर रही है.

अपने ही कर्म और अपना ही लेखन पीछा करते हैं, शर्मिन्दा करते हैं, दुख का कारण बनते हैं..

मेरी नज़र में तो लेखन ही लेखक का चरित्र निर्धारण भी करते हैं...काफी हद तक!!

इसी से सीख लेकर अब भी सुधर जायें तो भविष्य में सुकून मिले. वर्तमान ही भविष्य में भूत होगा.

कहीं चैन नहीं- जाऊँ तो जाऊँ कहाँ!!!!


(तस्वीर: खुद से शर्मिंदा, बेचैन और लजाते हुए समीर लाल 'समीर')
 
 
दिल से जो बात निकलती है ,असर रखती है
पर नहीं , ताक़ते - परवाज़ मगर रखती है
 
 
मुझे तो ऊँचा सुनता ही था, लगता है कि भगवान को मुझसे भी ऊँचा सुनता है. काश, उन्हें कुछ कम ऊंचा सुनता तो मेरा सर कद्दू ना बना होता!
 

मैंने प्रेमिका से साफ़ तौर पर कहा की मैं इससे ज्यादा कुछ नहीं हूँ. लेकिन वो मुझमे संभावनाएं तलाशती रही. मैंने कविताओं से भी यही कहा. और उनका रवैया भी प्रेमिका जैसा रहा.
- देवी प्रसाद मिश्र (साभार- जलसा )
 

आजकल बुखार के साथ जानलेवा पीलिया का प्रकोप चल रहा है.... कृपया फिल्टर्ड पानी पीएं, खाने की शुद्धता पर ध्यान दें, बाजारू खाने और विशेष रूप से तले भुने जंकफूड से परहेज़ करें।
 

कल्याण रेलवे स्टेशन।
अध्यापक दिवस पर मास्टरी का पहला कर्म बहुत अच्छा रहा। तीन लम्बी कक्षाओं के पश्चात संतुष्ट वापस लौट रहा हूँ।
आ नो भद्रा: क्रतवो यंतु विश्वत:।
अब एक उपन्यास पढ़ने जा रहा हूँ... मिलते हैं कल लखनऊ में :)
 

शहर - फिर घर बदलने के लम्बे डिस्टर्बेंस के बाद अपनी रचनात्मकता को समेट रही हूँ. कविताएँ मेरा मन नहीं भरतीं. आज एक छोटी कहानी पूरी की.
 

कांग्रेस विश्वास करने लायक है ही नहीं. विश्वास न हो तो अमर सिंह से पूछ कर देख लो.. :) #चुटकी
 
 
तारीफ करनी पड़ेगी पार्थिव पटेल की मम्मी की...जो उन्होंने इतनी ठंड में उन्हें खेलने के लिए बाहर भेज दिया!
 

फिल्‍मों की कमाई अरब तक पहुंची। कुछ सालों में यह खरब होगी और फिर सब कुछ खराब भी हो सकता है...सावधान !!!
 

राष्‍ट्रवाद एक निर्मम परिघटना है तथा राज्‍य बहुधा 'व्‍यापक हित' में अनैतिक रास्‍ते अपनाता है किंतु ये जो 2700 बेनाम कब्रें कश्‍मीर के मानवाधिकार आयोग को मिली हैं इसके बाद मुझे एकदम जायज जान पड़ता है कि घाटी के कश्‍मीरी खुद को 'पराए देश का गुलाम' समझें और आजादी की कोशिश करें
 

  • आज विसर्जन करना हैं ******
    कुछ यादों का , कुछ वादों का ****
    कल से होगी नई बाते ****
    अपनों की , कुछ सपनो की ****
 

अब पहाड़ों ने भी चलना शुरू कर दिया है.....ऊंट चाहे कितना भी थम थम के चलें....अब हौसले भी जग गए हैं....उड़ानें तो सदा से हौसलों की ही हुआ करती हैं....!!!!
 

शुभ रात रहे, शुभ प्रात रहे/ घायल न कोई जज़्बात रहे
सब रहें प्यार से जीवन में / क्यों घात रहे, प्रतिघात रहे
हर शख्स कहे क्या बात कही /कुछ ऐसी अपनी बात रहे
हम तोड़ें अपनी चुप्पी को/ भावों की मधुर बरसात रहे
मंजिल से पहले रुकें नहीं/ अपनी ऐसी शुरुआत रहे
यह जीवन अपना हो सुन्दर/ इस दुनिया को सौगात रहे
सब एक रहें सब मानुष हैं/ क्यों धर्म, जात औ पात रहे
बस हमें आपका प्यार मिले/ पंकज की इतनी बात रहे
 

इश्क और अश्क का बहुत पुराना नाता है,,
हर्फों पे मत जावो यारों दिल में यह चुभ जाता है ,,
 

  • दर्द दर्द है, ख्वाब ख्वाब है
    एक तू थी, एक आज है
    है यही दुआ परवरदिगार से
    रहे दर्द-ए-दिल कायम हमेशा
    गुजरता रहे आज भी, तू कारसाज है...CDS
 
 


लो फ़िर दे गया आदेश किसी को , कोई पाकिस्तानी आका ,
अजमल , अफ़ज़ल , को ज़िंदा रखो , करें रोज़ शहर में धमाका ....

आज फ़िर कई घरों के चिराग बुझ गए , मगर अफ़सोस कि एक भी सिसासतदान नहीं आ सका चपेट में
 

  • आजकल बस एक ही बात , इकदूजे से ,पूछें जेल के संतरी ,
    कित्ता स्कोर हो गया टोटल , अबे कितने आ गए मंतरी ....
 

बहिन जी का जुत्ती आया , धर के हवाईजहाज ,
विकीलीक्ज़ को आगरा भेजो , खोल दिहिस सब राज़ .....

अबे हाथी बीमार होगा त जेट से मंगा ली ..ई मे कौन जुलुम है हो ...
 
तो आज के लिए बस इतना ही ..............अपना ख्याल रखिएगा दोस्तों 

5 टिप्‍पणियां:

  1. आपका आभार ... इन चेहरों की बात को आपने अपने ही अंदाज़ में हम तक पहुंचा दिया !

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  2. आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    चर्चा मंच-631,चर्चाकार --- दिलबाग विर्क

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर संकलन अजय जी ।

    उत्तर देंहटाएं

पोस्ट में फ़ेसबुक मित्रों की ताज़ा बतकही को टिप्पणियों के खूबसूरत टुकडों के रूप में सहेज कर रख दिया है , ...अब आप बताइए कि आपको कैसी लगे ..इन चेहरों के ये अफ़साने