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सोमवार, 10 अक्तूबर 2011

आंसू नमकीन ,चेहरे गमगीन ..












Very Sad news

सुना है बन्द कर ली उसने आँखे,
कई रातों से वो सोया नहीं था







  • मेरा दर्द जाने वो कैसे अपनी ज़बानी गा लेता था
    मैं हंसती थी तो भी वो मेरी आँख का पानी गा लेता था
    आशा





न बात पूरी हुयी थी कि रात टूट गयी
अधूरे ख्वाब की आधी सज़ा में जीते हैं..... :-(








Danda Lakhnavi

ग़ज़ल गायक जगजीत सिंह को शब्दाजंलि....
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जब - बल - खाएंगी हवा, झूंमेगे कचनार।
तब मृदु स्वर जगजीत के, छूलेंगे मन-तार॥
बिरली उसकी -गायकी, अद्भुत उसकी प्रीत।
गायन से जगजीत ने, स्वयं लिया जगजीत॥






RIP











  • गजल जिसने हम सबको अपना बचपन दिखाया... जब भी सुनो आँख भर आती थी, आज कुछ ज्यादा ही भर आई क्योकि ना तो अब वो बचपन रहा ना वो शख्स जो हमारे हर याद, हर गम, हर पैग, ज़माने और मोहब्बत की हर ठोखरो में शामिल था|


Jagjit Singh or Jaggu dada as I used to refer to you, R.I.P. Your singing evoked tears of emotion in a young lad of 13 years. Your singing was the school which helped him to understand beauty of poetry and soul touching music. You will be missed, terribly missed !!!
सुना है पहले भी ऐसे में बुझ गये हैं चिराग,
दिलों की खैर मनाओ, बडी उदास है रात । :(




किसको आती है मसीहाई किसे आवाज दूँ / बोल ए खुँखार तन्हाई किसे आवाज दूँ / चुप रहुँ तो हर नफ़स डसता है नागन की तरह / आह भरने में है रुसवाई किसे आवाज दूँ / उफ़ खामोशी की ये आहें दिल को भरमाती हुई / उफ़ ये सन्नाटे की शहनाई किसे आवाज दूँ ॥ ( जोश मलीहाबादी )



  • एक श्रद्धांजली
    धरती का कण कण डोल उठा , चट्टानें हिली हिमालय की ।
    सागर की लहरें सुप्त हुई , रोई गंगा जमुना बिलखी ।।
    हे राम तुझे यह क्या सूझी , यह तुमने क्या कर डाला ।
    कहाँ मिलेगा जगजीत जैसा , मीठी धुनों का मतवाला ।।
    म्रत्यु-लोक को ख्याति उसकी , शायद रास नहीं आई ।
    म्रत्यु वरण कर साथ ले गई , क्षणिक नहीं देरी लाई ।।




दो हफ्ते और दो परिवर्तनकारियों की मौत...एक जिसने तकनीकी दुनिया की दिशा बदल दी और दूसरा जिसने ग़ज़लों को उर्दू जानकारों की ज़द से छुड़ाकर आम लोगों के दिल में उतार दी. दोनों को सादर नमन और श्रद्धांजलि
 
 

  • अपनी आवाज़ से तूने मेरा जग जीत लिया,
    तेरी आवाज़ को सीने से लगा रक्खा है ।
    मेरे सुनने तलक तू मुझमेँ रहेगा ज़िँदा,
    अपना जीना तेरे मरने को बचा रक्खा है ।
    ये गज़ल, गीत तेरे और थोड़ा तू ख़ुद भी,
    हमने इस दिल को तेरी बज़्म बना रक्खा है ।
    तुझे जो मौत मिली उसका ग़म तो है लेकिन,
    हमको जीने मेँ भी रखा है तो क्या रक्खा है ।
    -RIP Jagjit Singh.



सुबह खबर मिली जगजीत साहब के जग जीत कर दुनिया छोड़ जाने की, लेकिन पेशे की ऐसी मज़बूरी कि सुबह से लेकर शाम और रात के बाद अब देर रात फेसबुक पर श्रद्धांजलि देने का मौका मिला. जगजीत साहब के लिए जो कहा जाए कम है, उनकी जिस भी ग़ज़ल को सुना जाये वो एहसास दिला जाती है कि दिल कि आवाज़ क्या होती है और सकून क्या होता है, उपरवाला उन्हें जन्नत नसीब करे....


आह!!!
एक ख्वाहिश थी - इस नाचीज़ की ग़ज़ल को जगजीत सा'ब अपनी आवाज़ बख्श दें. जो अब हमेशा- हमेशा के लिए अधूरी रह गयी. पिछले 8 साल पहले उनके नाम एक ख़त लिखा था, जो मैं पोस्ट भी न कर सका.. आज भी वो ख़त ज्यों का त्यों मेरे पास मौजूद है. मगर अफ़सोस अब उस ख़त को पढने वाला ही नहीं रहा.. एक टीस रह गयी दिल में. काश वो ख़त पोस्ट किया होता. खुद ग़म में रहकर हमें अपनी ग़ज़लों से जिंदा रखा आज वही नहीं है. अब और नहीं लिखा जा रहा है. आँखों में नमी आ गयी. वो मखमली आवाज़ और वो हमेशा यूँ ही जिंदा रहेंगे जैसे पहले थे..
वो कौन है दुनिया में जिसे ग़म नहीं होता..
किस घर में ख़ुशी होती है मातम नहीं होता..


जगजीत सिंह, एक ऐसा नाम जो गज़ल का पर्यायवाची है ! हम कैसे कह सकते है की गज़ल की मृत्यु हो गई ?









तमन्ना थी आवाज के  जादूगर से   बड़ी हसरत थी दिल में कुछ कहने की कुछ सुनने की बड़ी तमन्ना थी दिल में आवाज के जादूगर से मिलने की जो हर पल एक कली सा  जीवन के आँगन में गजलों  के खुशबू  फैलता था मन...






Tribute to Jagjit Singh by Lata Mangeshkar

mohallalive.com
नमस्‍कार। आज एक बहुत ही दुख भरा दिन है क्‍योंकि महान गजल गायक जगजीत सिंह जी आज हमारे बीच नहीं रहे। मेरी उनके साथ पहचान काफी पुरानी थी और हमने एक गजल अलबम भी एक साथ किया, जिसका नाम था सजदा, जिसे लोगों ने बहुत पसंद किया। वो हमें बहुत याद आएंगे, और मैं उन्‍हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पण करती हूं।






  • जिनको दुनिया की निगाहों से छुपाए रखा,
    जिनको एक उम्र कलेजे से लगाए रखा,
    दीन जिनको, जिन्हें इमान बनाए रखा।

    तूने दुनिया की निगाहों से जो बचकर लिखे
    साल-हा-साल मेरे नाम बराबर लिखे,
    कभी दिन में तो, कभी रात को उठकर लिखे।

    तेरी खुशबू में बसे खत, मैं जलाता कैसे?
    प्यार में डूबे हुए खत,मैं जलाता कैसे?
    तेरे हाथों के लिखे खत,मैं जलाता कैसे?
    तेरे खत आज, मैं गंगा में बहा आया हूं...
    आग बहते हुए पानी में लगा आया हूं।

    (बहुत याद आओगे आप....)


    जब तक हाथ में काम था,
    तब तक दिल को आराम था
    अब जब आराम से लेटा
    तो पाया
    तुम्हारे गीत रह रह के
    जहन में आ ही जाते हैं
    अब तुम नहीं गाओगे
    फिर कभी अपनी गजलों को
    ये सच्चाई बता कर
    दो आंसू रुला ही जाते हैं

    आप को क्या समर्पित करूँ आप तो स्वयं ही जग को जीत चुके थे


    • तेरी आवाज़ , से लिपट कर, हाय कितना रोए मीत मेरे ,
      उदास शाम अब कटेगी कैसे ,तू कहां गया जगजीत मेरे ...
     

दिवस की शुरुआत कैसी उदास यह...
जगजीत के बिना यह पहली सुबह...

1 टिप्पणी:

  1. hindi gazal ki ek kadi tut gayi,
    hriday ki shiraon me sama jane wale aawaj ke jadugar hamshe ruth gaye,
    is khudgarj ki dard bhari duniya se ruh unki chhut gayi.

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