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रविवार, 14 सितंबर 2014

हिंदी हैं हम ………………फ़ेसबुकनामा

FB 712 - 14 सितम्बर - 'हिन्दी दिवस' है !

 

Amitabh Bachchan

FB 712 - 14 सितम्बर - 'हिन्दी दिवस' है !

 

ऋता शेखर 'मधु'

हिन्दी भाषा...

हिन्दी भाषा में उगी, कविताओं की पौध

सजे हुए हैं शाख पर, पन्त गुप्त हरिऔध

पन्त गुप्त हरिऔध, महादेवी जयशंकर

जायसी कालिदास, रहीम सुभद्रा दिनकर

तुलसी जी के राम, कृष्णलीला कालिन्दी

पा उन्नत साहित्य, फूलती फलती हिन्दी

*ऋता शेखर 'मधु' *

 

 

Kajal Kumar

इस देश के लि‍ए हिंदी बहुत ज़रूरी है ...

(जब तक कि‍ मैं ढंग की अंग्रेज़ी बोलना न सीख जाउं)

 

 

Kamlesh Bhagwati Parsad Verma

हम हिंदी क्यूँ बोलें ??

जब हिंदी बोलने वालों को निम्न समझ के "महाराष्ट्र'पंजाब"में उनको एक नये उपनाम से बुलाया जाता है।

जबकि ये लोग अपनी खुद की मार्तु भाषा को बोल चाल के अलावा कहीं भी सम्मान नही देते।

फिल्मे टीवी सीरियल या गीत ये और इनकी औरतें बच्चे सब हिंदी ही देखतें हैं।

यह मेरा पंजाब में रह कर 30 साल के अनुभव के आधार पर लिख रहा हूँ।

यह व्यवहार यहाँ के समाज की विकृत मानसिकता का द्योतक है।।

 

 

डॉ. सुनीता

सम्पूर्ण देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ !!!

हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर...मुझे याद है आज तक अंग्रेज़ी को छोड़कर बाक़ी कई भाषाओं को लिखना-पढ़ना बेहद पसंद रहा है...मेरी नज़र में मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि है... 'ब्रेल' और 'खरोष्ठी' लिपि लिखना और पढ़ना है...भाषा कोई भी हो आदर सम्मान किया जाना चाहिए... लेकिन अपने माँ का निरादर बेहद निंदनीय है...हर भाषा से प्यार कीजिए मगर अपनी माँ को उपेक्षित करके नहीं...

 

 

Prakash Govind

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ABP न्यूज़ द्वारा

हिन्दी दिवस पर ब्लॉगरों का सम्मान

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दिल्ली के मुकेश तिवारी को राजनीतिक मुद्दों पर लेखन के लिए

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इंदौर के प्रकाश हिंदुस्तानी को समसामयिकी विषयों पर लेखन के लिए

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दिल्ली के प्रभात रंजन को हिंदी साहित्य और समाज पर लेखन के लिए

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दिल्ली की फिरदौस खान को साहित्य के मुद्दों पर लेखन के लिए.

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फतेहपुर के प्रवीण त्रिवेदी को स्कूली शिक्षा और बच्चों के मुद्दों पर लेखन के लिए

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लंदन की शिखा वार्ष्णेय को महिला और घरेलू विषयों पर लेखन के लिए

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मुंबई के अजय ब्रह्मात्मज को सिनेमा व लाइफस्टाइल पर लेखन के लिए

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दिल्ली की रचना को महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर लेखन के लिए

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अलवर के शशांक द्विवेदी के विज्ञान के मुद्दों पर लेखन के लिए

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दिल्ली के पंकज चतुर्वेदी को पर्यावरण मुद्दों के लेखन के लिए

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Manisha Pandey

इंसानी दिमाग की किसी भी तरह की बैरीकेडिंग, चौकीदारी खतरनाक है, फिर चाहे चौकीदार दक्षिण खेमे का सिपाही हो, चाहे वाम खेमे का। दिल, दिमाग और अंतरात्‍मा की आजादी में ही उसकी मुक्ति है। हर चश्‍मे से ऊपर उठकर जीवन को देखना, समझना और सबसे पहले खुद को समझना।

 

 

Richa Srivastava

दोस्तों ,, "हिंदी दिवस" तो हो लिया!!! आइये किसी दिन "फेसबुक" दिवस मनाते हैं। तारीख आप लोग निर्धारित कर के सूचित करिये !!

 

 

Kailash Sharma

माथे की बिंदी

देश का मान हिंदी

सदा चमके.

***

अपना देश

अपनी ही हो भाषा

वक़्त की मांग.

....कैलाश शर्मा

 

 

Awesh Tiwari

जानेमन ,तुम्हारा प्यार हिंदी है |

 

 

Anshu Mali Rastogi feeling awesome

अभी जब मैंने पनबाडी से सिगरेट मांगी तो उसने देने से मना कर दिया। बोला- सर, आज 'हिंदी डे'। आप 'सिगरेट' नहीं 'धुम्रदंडिका' बोलकर मांगे, तभी मिलेगी।

 

 

संजीव तिवारी

हिन्दी हैं हम ... 'हिन्दी भारत की राजभाषा होगी'. 14 सितम्बर, 1949 को संविधान सभा के द्वारा एकमत से यह संकल्प पारित किया गया. राष्ट्रभाषा प्रचार समिति वर्धा के अनुरोध पर 1953 से इस दिन को पूरे भारत में हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाता है. यह राजनीति को आइना दिखाने का दिन है. 'बिजराने' का दिन है, तुम्हारे नहीं चाहने के बाद भी हमारी हिन्दी समूचे विश्व में छा रही है. @तमंचा रायपुरी

 

 

Sanjay Bengani

दिमाग को तेज करना है? तो हिन्दी में पढ़िये.

-यह क्या तुक हुई?

है ना तुक. बिलकुल है.

जब आप हिन्दी में पढ़ते है तब आपके दिमाग के दोनो भाग सक्रिय रहते है, ऐसा देवनागरी लिपि में लगने वाली मात्राओं की वजह से होता है, जो दाएं-बाएं और ऊपर-नीचे लगती है. इस कारण पढ़ते समय दिमाग के दोनो हिस्सों को तालमेल के साथ सक्रिय रहना पड़ता है.

जब हम हिन्दी में पढ़ रहे होते हैं दिमाग के बाएं भाग में इंसुला, कुजिफोर्म गायरस तथा फ्रंटल गायरस सक्रिय होते हैं और दाएं भाग में मिडल फ्रंटल गायरस और ऑक्सिपिटल क्षेत्र सक्रिय होते हैं. जबकि रोमन लिपि में पढ़ते समय केवल मिडल-फ्रंटल गायरस ही सक्रिय रहता है, क्योंकि रोमन सपाट एक तरफ पढ़ी जाती है.

कहना का तात्पर्य यह है कि बुद्धू मत बनो, हिन्दी पढ़ो

 

 

Anju Sharma

हिंदी मातृभाषा है। कॉमर्स की पढ़ाई और कार्यक्षेत्र की भाषा अंग्रेज़ी रही है। हिंदी कैसे छूटती सारी भरपाई पढ़कर पूरी होती रही। हिंदी से जुड़ाव का असर बच्चों पर भी पड़ा। दोनों बच्चों विशेषकर छोटी बेटी की हिंदी बहुत अच्छी है। आज सुबह से छोटी बेटी शुद्ध हिंदी के वाक्य बोलकर 'हिंदी दिवस' मना रही है। जैसे घर में होनेवाले पेंट का रंग चुनने में हो रही बहस में उसने कहा, 'आप कृपया अपनी बात का आशय स्पष्ट करें।' या 'ओह, फिर से धूल होगी। अर्थात हमारा सफाई का प्रयास तो व्यर्थ ही रहा।' उसकी हिंदी सुनकर सब लोग हंस रहे हैं और मैं समझ नहीं पा रही कि शुद्ध हिंदी बोलती बिटिया की बलैयां लूँ या हिंदी पर हँसे जाने पर दुखी होऊं।

 

 

Sangita Puri

अपनी भाषा, अपने ज्ञान विज्ञान, अपनी चिंतन शैली, अपनी चिकित्‍सा प्रणाली के नष्‍ट भ्रष्‍ट किए जाने का जिन्‍हें अफसोस नहीं, वही इनकी तुलना उनभाषा, उन विज्ञानों, उन चिकित्‍सा प्रणालियों से यदा कदा करते रहते हैं , जिनके विकास के लिए पूरा विश्‍व तत्‍पर है, अपनी मां और भाई बहन गरीब हो तो अमीर मां की गोद में बैठ कर अमीर भाई बहन बना लेना कोई बहादुरी का काम तो नहीं ... बहादुरी तो अपनी मां और भाई बंधु को अमीर बनाने में है ... अपने देश की व्‍यवस्‍था सुधारिए और इसपर गर्व कीजिए !!

 

 

Rekha Joshi

हिंदी भाषा में बस रही हमारी जान है

हिंदी भाषा नही यह हमारी पहचान है

मिले सदा सम्मान हमारी मातृ भाषा को

हमारे भारत की आन बान और शान है

रेखा जोशी

 

 

Alankar Rastogi

"अच्छा हुआ हिंदी दिवस छुट्टी के दिन पड़ा वरना न जाने कितने बच्चे आज के दिन भी अंग्रेजी स्कूलों में हिंदी बोलने की सज़ा पा जाते."

 

 

Vijay Sappatti

दोस्तों , मेरे लिए तो रोज ही हिंदी दिवस है . हिंदी बोलता हूँ , हिंदी सुनता हूँ , हिंदी लिखता हूँ , हिंदी पढता हूँ .. हिंदी ही के चलते , लेखन में थोडा सी जगह मिली है . मैं अहिन्दी भाषी हूँ और हिंदी में लिखता हूँ , यही मेरे लिए सबसे बड़े गर्व की बात है . और हां , एक बात और हिंदी में ही सपने देखता हूँ !

 

 

Jitendra Jeetu

हिंदी के लेखकों को अन्य देसी- विदेसी भाषाओ में पढ़कर हिंदी में लिखना चाहिए। ताकि हिंदी में पाठकों को अच्छा साहित्य उपलब्ध हो सके। प्रकाशकों को इन्हें छापने में उसी तरह तत्परता दिखानी चाहिए जैसी वे अंग्रेजी में दिखाते हैं। हिंदी पुस्तकों के प्रचार- प्रसार के लिए मोबाइल कंपनियों से सहयोग लेना चाहिए। एक मोबाइल केसाथ एक किताब हिंदी में मुफ्त। सरकार के लिए भी गुंजायश है। वह प्रधान मंत्री जन धन योजना की तर्ज पर पुस्तक तन- मन-धन योजना चालू कर सकती है। 500 रूपए से ऊपर खाता खोलने पर साथ में एक किताब। सरकार अपनी खाद्य योजना में किताब भी शामिल करे। पढना भी तो भूख ही है।

आम जनता भी कुछ करे। पुस्तक को सीधे प्रेम से जोड़ दें। जिससे प्रेम करें उसेखूब पुस्तकें भेंट करें। प्यार भी परवान चढ़ेगा और हिंदी पुस्तक पढने की संस्कृति भी। पुस्तके तो हिंदी में ही होंगी न!

इसकी अलावा काफी कुछ अपनी हिंदी के लिए किया जा सकता है। लेकिन सभी बातें सिर्फ हिंदी दिवस पर ही क्यों??? पूरा वर्ष हिंदी के उत्थान के लिए नहीं है ??

 

 

अजय कुमार झा

हिंदी दिवस की बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं मित्रों , बनिस्पति इसके कि पिछले दिनों प्रशासन की सर्वोच्च संस्थाओं में से एक न्यायपालिका ने हिंदी को फ़िलहाल हाशिए पर रहने देने का ही निर्णय सुनाया , बनिस्पत इसके कि पिछले ही दिनों सर्वोच्च प्रशासनिक पदों के लिए भी हिंदी के साथ दोयम दर्ज़े का व्यवहार होता रहा , बनिस्पत इसके कि पिछले दिनों तो खूब पिटती पिटाती रही है हिंदी और हिंदी वाले भी , अब अपनी सुन लीजीए , बनिस्पत इसके कि , लगभग तीन वर्ष पहले कार्यालय में राजभाषा हिंदी से संबंधित सारे काम काज देखने का भार मुझे अतिरिक्त भार के रूप में दिया गया था ..इत्ता अतिरिक्त हो गया कि ............ आज तक एक भी काम आधिकारिक रूप से करने को मुझे दिया ही नहीं गया , अलबत्ता अपनी धुन में लगे सरकारी कागज़ों में धर धर के हिंदी बिखेरी अब भी बिखेर रहे हैं , तो इत्ते सारे बनिस्पतों के बावजूद हिंदी दिवस की जय हो .......क्यों ...क्योंकि अबकि अपना सबसे बडा मंत्री जबरदस्त हिंदियास्टिक व्यक्ति हैं ..और फ़िर आज तो हिंदी अंतर्जाल के पुराने पथिक हिंदी ब्लॉगरों को एक टीवी चैनल सार्वजनिक रूप से लोगों से रूबरू करवाते हुए उन्हें सम्मानित करने जा रहा है , अब से ठीक आधे घंटे के बाद ..............तो हिंदी जिंदाबाद , ब्लॉगिरी जिंदाबाद ,ब्लॉगर जिंदाबाद ..सबको ढेरम ढेर शुभकामनाएं जी

2 टिप्‍पणियां:

  1. अरे वाह. आज तो मैं भी यहां छपा घूम रहा हूं

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    1. आप तो हमारे दिल में हैं काजल भाई , बाहर तो कभी कभी छापते हैं महाराज

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पोस्ट में फ़ेसबुक मित्रों की ताज़ा बतकही को टिप्पणियों के खूबसूरत टुकडों के रूप में सहेज कर रख दिया है , ...अब आप बताइए कि आपको कैसी लगे ..इन चेहरों के ये अफ़साने