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शनिवार, 25 फ़रवरी 2012

कम्बख्त इच्छायें भी तरावट मांगती हैं :)....फ़ेसबुक से कुछ कतरे







आइए देखें कि , दोस्त इन दिनों , फ़ेसबुक पर क्या लिख पढ और देख सुन रहे हैं ...इन कतरों से जानते हैं

एक मित्र के लिए, जिसे होले बहुत पसंद है - सुप्रभात



  • मैं उनकी आँखों से सपने देखता हूँ,
    मेरी आँखें उन्हें जो देखती हैं !
     

    आज मेरी माँ की लाडो बेटी का जन्मदिन है. हालाँकि इस बात पर हमारा झगड़ा अभी तक चल ही रहा है. वो क्या है ना कि इसमें भी नम्बर वन टू थ्री फोर का मामला है. थ्री फोर में कोई टेंशन नहीं है. लेकिन वन और टू को लेकर हममें अब तक कोई समझौता नहीं हुआ है. मजे कि बात ये है कि क्रमानुसार देखे तो नंबर थ्री यानी कि मैं और नंबर फोर यानी कि मेरी सबसे प्यारी व नकचढ़ी बहन निकिया (निशि) में नम्बर वन के लिए द्वंद्व बना हुआ है. खैर आज मुझे जो खुशी हो रही है उसे तो मैं फेसबुक में सबको बताना चाहूंगी, निक्की तुम्हारे केक का पूरा हिस्सा आज मैं खाऊँगी, और तो और पूरी सब्जी खीर ये सब भी तुम्हारावाला हिस्सा भी आज मेरे हिस्से में आ गया है. फोन पे इन सबकी भीनी-भीनी महक भेज दूँगी आज उसी से संतोष कर लेना.....आज पापा के दोनों बगल में मैं ही बैठूंगी...... और तुम मुझे ठेल ठेल कर कोई कोशिश नहीं कर सकती... वैसे मुझे डर है इतना सब सुनने के बाद तुम जल्दी से टिकट करा के बेंगुलुरु से घर आ जाओगी, वैसे भी सभी तुम्हारा बेसब्री से इंतज़ार कर रहे है. we all miss you very much on your day....... happy birthday to my नकचढ़ी sis!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
     

    तेरे बगैर किसी चीज की कमी नहीं
    तेरे बगैर तबीयत उदास रहती है
    रात तो रात है
    धूप भी रात लगती है.......
     
     

    प्यार की डगर पे लडको तुम दिखाओ चल के...
    ये लडकियाँ हैँ तुम्हारी आशिक तुम्हीं हो कल के
     
    सौ हेमंत
    सौ बसंत
    सौ शरद
    बदलने के बावजूद
    कभी कभी
    जलता ही
    रह जाता है
    मन का मौसम
    ग्रीष्म की तरह
    जाने क्यों ?

    आशा पांडे ओझा
     


    जय हो ढोंगी बाबा की :)

    १. हर मजनू को उसकी लैला से प्यार का इजहार करने का एक सुनहरा अवसर दिया जाएगा.. :D
     
    उसने कहा सुन
    अहद निभाने की ख़ातिर मत आना
    अहद निभानेवाले अक्सर मजबूरी या
    महजूरी की थकन से लौटा करते हैं

    तुम जाओ और दरिया-दरिया प्यास बुझाओ

    जिन आँखों में डूबो
    जिस दिल में भी उतरो
    मेरी तलब आवाज़ न देगी

    लेकिन जब मेरी चाहत और मेरी ख़्वाहिश की लौ
    इतनी तेज़ और इतनी ऊँची हो जाये
    जब दिल रो दे
    तब लौट आना

    | फराज़
     
    भूख से इन्सान पैदा होता है. उम्र भर उसे भूख सताती है- प्रेम की, रोटी की, शांति की. भूख और प्यास हमारे सबसे बड़े भुत हैं. मैं सबसे पहले इन भूतों से मुक्ति पाना चाहता हूँ. दूसरी मुक्ति मुझे आप से आप मिल जाएगी.
    - कुर्तुल एन हैदर (आग का दरिया)
     


    चिलचिलाती धूप में डेढ़ किलोमीटर का आफ्टरनून वॉक करके एक जगह पहूंचा हूँ। इतनी कम दूरी के लिये कोई टैक्सी वाला आने तैयार ही नहीं हुआ। एक को पूछा, दूसरे को ...तीसरे को और पूछते पूछते सबके ना करने के बीच जब मंजिल करीब दिखी तो पैदल ही 'दाब' दिया :)

    भयंकर गर्मी के बीच रास्ते में पानी का टैंकर जाता दिखा जिसके होज पाईप से पानी लीक हो रहा था। मन किया टैंकर वाले को कीमत अदा कर गाड़ी साईड में लगवाऊं और टैंकर के वाल्व खोल उसके बंबे के मोटे पानी से खूब तरी लूँ :)

    कम्बख्त इच्छायें भी तरावट मांगती हैं :)
     
    मैं चलता हूं
    मतलब अखबारों के पास रुकता हूं
    कुछ खबरें पकड़ता हूं
    कुछ खबरों में खुद को जकड़ता हूं
    आप सोच रहे होंगे कि
    मैं क्‍यों इतना अकड़ता हूं
    अकड़ अकड़ कर हो जाता हूं मैं ढीला
    खबरों का मन और मानस में
    बनाता हूं एक खूबसूरत मजबूत टीला
    फिर उस टीले पर सबको चढ़ाता हूं
    मैं तो उतर आता हूं
    आप सबको वहीं पर छोड़ आता हूं।

    तैयार रहिए
    कुछ न कहिए
    सुनते रहिए
    पसंद करिए
    टिप्‍पणी कहिए
    विचारों में करवट
    तरावट महसूसिए

    पुस्‍तक मेले की सोचिए
     
     
    मित्रता अनुरोध भेजने वाले उन मित्रों के प्रति खेद है, जिनका आग्रह चाह कर भी स्वीकार कर पाना अनेकानेक कारणों से संभव नहीं।
    सबसे पहला तो यह कि गत लगभग साढ़े तीन माह में 2 हज़ार से अधिक लोगों को अनफ़्रेंड करने के बाद भी मेरी मित्रता सूची में 4000 + का आंकड़ा पहले ही पूरा हो चुका है, अधिकतम 5000 तक नहीं ले जा सकती क्योंकि कुछ अवकाश बना रहना चाहिए। ऐसे में मैं चाह कर भी मनवांछित लोगों को पढ़ नहीं पाती।
    प्रतिदिन 6-से 10 लोगों को ( जिन्होने वर्ष भर से कभी कोई संवाद नहीं किया या जिनकी प्रोफाईल से कुछ संदिग्ध प्रतीत होता है) को सूची से हटाने के बाद ही किन्हीं नए मित्रों को जोड़ा जा पा रहा है। किन्तु अधिकांश का आग्रह अस्वीकार करना पड़ता है।
    ऐसे मित्र बुरा न मानें। वे मित्रतासूची में न होकर भी नेट पर जुड़े रह सकते हैं क्योंकि मेरे अधिकांश अपडेट सार्वजनिक होते हैं, हर कोई उन्हें पढ़ सकता है उन पर अपनी प्रतिक्रिया लिख सकता है। अतः संवाद में कोई समस्या नहीं।
    सब्स्क्रिप्शन का विकल्प भी खुला है, इसके द्वारा सभी अपडेट आपको आपकी प्रोफाईल में मिल सकते हैं। सब्स्क्राईब करने में कोई अड़चन अथवा सीमा नहीं है। मैं अपनी प्रोफाईल को पेज़ बनाने अथवा एक और नई प्रोफाईल बनाने के फिलहाल पक्ष में नहीं हूँ। अतः यह मेरी सीमा है। क्षमा कीजिएगा।
     


    पिछले एक घंटे से गोरखपुर से नई दिल्ली के लिए रिज़र्वेशन के प्रयास में लगा हूं. आइआरसीटीसी की सूचना के मुताबिक 26 मई की तारीख में अभी काफ़ी बर्थ शेष हैं, लेकिन पूरा प्रॉसेस होने के बाद पासवर्ड वेरीफिकेशन की जगह कोई डिब्बा ही नहीं बन रहा है. कम से कम 10 बार कोशिश कर चुका हूं, पर नतीजा निल. ये है कांग्रेसी पारदर्शिता. अकसर ऐसा ही होता है. आप क्या कर लेंगें
    एक आंचलिक -पूर्वांचली शब्द है -समौरी -जिसका अर्थ है समवयी लोग -मित्रगण क्या इस शब्द की व्युत्पत्ति को प्रकाशित कर सकेगें!
     
     

    Sudha upadhyaya
    हम चुप हैं की खलल न पड़े चुप्पी में
    आप चुप हैं की सबकुछ कहा जा चुका है
    वे भी चुप हैं की जवाब देने के लिए उनके पास कुछ भी नहीं
    आवो बात कर लें इसी बारे में
    जिसे लेकर इतने लम्बे अरसे तक हम चुप रहे ...
     

1 टिप्पणी:

  1. बहुत हिट पोस्ट है यह...! खासकर सतीश पंचम का पंच,सुधा जी की 'चुप्पी' और अभिषेक कुमार की कविता !

    झाजी...आभार !

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पोस्ट में फ़ेसबुक मित्रों की ताज़ा बतकही को टिप्पणियों के खूबसूरत टुकडों के रूप में सहेज कर रख दिया है , ...अब आप बताइए कि आपको कैसी लगे ..इन चेहरों के ये अफ़साने