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बुधवार, 13 जून 2012

फ़ेसबुक की बातें




लघुकथा
उसके आँसू....
वो एक कोने मे बैठ कर बुरी तरह रो रही थी. लोग उसे समझा रहे थे मगर वह रोये चली जा रही थी.
उसका देख कर आसपास खड़े लोगों की आँखें भी नम हो गयीं. क्या करें, कैसे समझायें इसको. जो आता है, एक दिन जाता है.
एक ने पूछा- ''आखिर ये है कौन, और किसके गम में फूट-फूट कर रो रही है?''
दूसरे ने उदास स्वर में कहा-'' इसका नाम है 'ग़ज़ल' . यह मेहंदी हसन की मौत पर आंसू बहा रही है.''



Hari Jaipur was tagged in India Against Congress's photo.



भूगोल की किताबों में कभी पढ़ा था कि रबर की खेती भूमध्यरेखीय क्षेत्र, अमेजन, वर्षा वनों , हिल आदि में ज्यादा होती है लेकिन देख रहा हूँ सबसे अच्छा रबर रायसेना हिल्स क्षेत्र में पाया जाता है....जिसकी गुणवत्ता इतनी उच्च स्तर की है कि सजा पाये शख्स की मौत भी रबर की तरह अगली फसल आने तक खिंचा उठती है :)



हसरतें दिल की, तो कब की टूट के बिखर गईं हैं 'उदय'
अब ... ये कौन है, जो खामों-खां दस्तक दे रहा है वहां ?




वो गिल्ली डंडा , वो कंचे, वो इमली के चिंये , वो कटी पतंग , वो बहती नाक और वो सरकती नेकर और वो चुरा कर खाना मलाई दूध की , बहुत कुछ याद आता है बचपन का , पर कमबख्त अब वो बचपन लौट कर नहीं आता है |


आज फिर सजे हैं दिल पे उदासियों के मेले
आज फिर एक बार मेरे मन की नहीं हुई :-(




प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह हाल ही में जब वर्मा से लौट रहे थे तो रास्ते में पत्रकारों ने पूछा था कि आप क्या राष्ट्रपति पद की दौड़ में हैं, उस समय उन्होंने कहा था कि मैं अपने पद पर खुश हूँ।



हम ना बदलेंगे वक़्त की रफ़्तार के साथ,
हम जब भी मिलेंगे अंदाज़ पुराना होगा |



  • इस करुणा कलित हृदय में अब विकल रागिनी बजती
    क्यों हाहाकार स्वरों में वेदना असीम गरजती
    क्यों शून्य क्षितिज से आती लौट प्रतिध्वनि मेरी ? ... 'प्रसाद'

    होता है रोज दिल पर� बेचैन गम का अटैक
    क्यों मेरी बातों में सारे शिट होते पैक
    क्यों जाती है मोबाइल पर हर काल खाली मेरी? ...'उत्तराधुनिक कवि'



‎26 जनवरी की परेड में सलूट लेने के अलावा राष्‍ट्रपति‍ का काम होता क्‍या है.... अरे भई कोई भी बने, चैनल काहे पगलाए पड़े हैं....



रहिमन अही संसार में
सब सुन मिलिए धय
न जाने केही रूप में
नारायण मिल जाए




इक जमाना लगता है जुड़ने में
तुम इक पल का खेल समझते हो
पकते पकते पकता है कोई रिश्ता
जिसे तुम इक झटके में तोड़ देते हो ............रत्नेश



वर्तमान वित्त मंत्री को प्रधान मंत्री ,एवं वर्तमान प्रधान मंत्री को राष्ट्रपति बनने हेतु मेरी अग्रिम शुभकामनाएँ !



सच में हमारे देश का इलेक्ट्रानिक मीडिया बहुत ज्यादा तेज़ है.जभी तो राष्ट्रपति क चुनाव हुआ नही है और सवाल पूछने लग गये है कि अगला प्रधानमंत्री कौन?



  • आपके और हमारे चहेते गायक नहीं रहे.दरअसल ऐसी शख्सियत को महज़ गायक कहना भी उचित नहीं है.मेंहदी साहब हमारे जीवन का हिस्सा थे और ऐसे में उनका न रहना हमें हमारी रूह से जुदा करता है :-(

    ...तुम कहीं नहीं गए,शामिल मेरी साँसों में हो,
    रंजिश ही सही पास मेरे,लौट आओ तुम !



लीजिये मुलायम - ममता की बैठक के बाद 3 नाम आए है राष्ट्रपति पद के लिए :-
1॰ डा ॰ ए पी जे अब्दुल कलाम
2 ॰ डा ॰ मनमोहन सिंह
और
3 ॰ सोमनाथ चेटर्जी

काँग्रेस के दोनों नाम यानि ... हमीद अंसारी और प्रणव मुखर्जी ... को खारिज कर दिया गया है !


प्रणव मुखर्जी को राष्ट्रपति बनवाने के पीछे कही अमेरिका की लौबिग तो नहीं है ....? वित्तमंत्री के रूप में उन्होंने देश की जनता के साथ जो व्यवहार किया है वह पूरी तरह से अमेरिकी आर्थिक नीतियों के प्रति पूर्ण प्रतिबद्धता को दर्शाता है .....अगर ऐसा है , तो बेहद अफसोसजनक ही कहा जायेगा .....हे राम



पापा कहते हे, बेटा बड़ा नाम करेगा . . . :)) 

12 टिप्‍पणियां:

  1. अरे वाह आज तो हम भी है लिस्ट मे ... अरे भैया इस पोस्ट की लिस्ट की बात कर रहा हूँ ... अब हर लिस्ट राष्ट्रपति चुनाव की थोड़े ही न होगी ... आप भी न ... ;-)

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    1. जय हो , अरे आप तो हमरे दिल में है जी

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  2. टिप्पणियों पर टिप्पणी जैसे काजू की कतली पर चांदी की वर्क |
    सज गई काजू की कतलियाँ | एक से बढ़ कर एक |

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  3. अमित श्रीवास्तव ने आपकी पोस्ट " फ़ेसबुक की बातें " पर एक टिप्पणी छोड़ी है:

    टिप्पणियों पर टिप्पणी जैसे काजू की कतली पर चांदी की वर्क |
    सज गई काजू की कतलियाँ | एक से बढ़ कर एक |

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  4. अरे..फेसबुक पर महिलाएँ नहीं हैं या...वे स्टेटस नहीं लिखती..या उनके स्टेटस जिक्र के लायक नहीं होते...या महिलाएँ आपकी फ्रेंड्स लिस्ट में नहीं हैं ??एक का भी जिक्र नहीं..:):)

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    1. हा हा हा अरे बाप रे ! आपकी महिला ब्रिगेड से बच निकलना तो मुश्किल है जी । रश्मि जी आज की पोस्ट का संयोग कहिए इसे और कुछ नहीं । असल में मैं इस ब्लॉग पर पोस्ट लगाने से कुछ समय पहले फ़ेसबुक पर लिखे गए अपडेट्स में से छांट लेता हूं बस , और मैंने तो गौर ही नहीं किया कि किसी महिला मित्र का कोई स्टेटस अपडेट नहीं है ।

      फेसबुक पर महिलाएँ नहीं हैं या...वे स्टेटस नहीं लिखती..या उनके स्टेटस जिक्र के लायक नहीं होते...या महिलाएँ आपकी फ्रेंड्स लिस्ट में नहीं हैं

      बाप रे इत्ते सारे क्यूं ? आप जरूर मुझे पिटवाइएगा । आगे से ध्यान रखूंगा जी :) :)

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  5. बढ़िया फेसबुक चर्चा।

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  6. सतीश पंचम जी का सबसे अच्छा लगा |
    और काजल जी को जवाब है की इस बार के राष्ट्रपति को २०१४ के सबसे मुश्किल ( कांग्रेस के अलावा लगभग सभी पार्टियों के लिए ) चुनावों के बाद सरकार बनाने के लिए पार्टियों को उसे ही आमंत्रित करना है जो सबसे पहले निमंत्रण पायेगा सरकार वही बना पायेगा, पूछलो को भी तो देखना है की उन्हें भी उस समय अपने लिए मोलभाव करने का समय और उस लायक पार्टी मिले , सो वो भी खूब उछल रहे है अभी से राष्ट्रपति के चुनावों के लिए |

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पोस्ट में फ़ेसबुक मित्रों की ताज़ा बतकही को टिप्पणियों के खूबसूरत टुकडों के रूप में सहेज कर रख दिया है , ...अब आप बताइए कि आपको कैसी लगे ..इन चेहरों के ये अफ़साने